Ayodhya Donation Scam. राम मंदिर में चढ़ावे की कथित चोरी से जुड़ा विवाद आम जनता की आस्था से जुड़ा एक संवेदनशील और गंभीर मुद्दा है. इन आरोपों ने देश भर में हलचल मचा दी है. यह मामला सिर्फ चोरी का नहीं, बल्कि धार्मिक संस्थानों में दान प्रबंधन, पारदर्शिता, औडिट व्यवस्था और जवाबदेही का भी प्रश्न बन गया है. अब देखना यह है कि एसआईटी की रिपोर्ट के बाद गुनहगारों को सजा मिल पाती है?
उत्मेंतर राम मंदिर के निर्माण और मूर्ति स्थापना की गाथा किसी से छिपी नहीं है, जिस में दशकों का संघर्ष, कानूनी लड़ाई, अनगिनत लोगों का बलिदान शामिल है. जब इस का भव्य स्वरूप साकार हुआ, तब मंदिर में चढ़ावे की बौछार लग गई. किंतु चढ़ावे के लुटेरे भी मंदिर के कर्ताधर्ता थे. चढ़ावा उन की लालची निगाहों की भेंट चढऩे लगा. एक वक्त ऐसा आया, जब मंदिर से जुड़े लोगों की आंखों का पानी उतर गया और वे दान के पैसे की हेराफेरी करने लगे.
यह सही तरह से नहीं कहा जा सकता कि चढ़ावे में चोरी कब से हो रही थी, लेकिन इस पर पहली नजर उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री और समाजवादी पार्टी के प्रमुख अखिलेश यादव की गई. उन्होंने इसे सार्वजनिक किया. इसे गंभीर मुद्दा बना दिया.
हुआ चोरी का खुलासा
बीते 4 मई की बात है. यात्री सुविधा केंद्र के बेसमेंट में चढ़ावे के पैसे की काउंटिंग हो रही थी. वहां काउंटिंग खत्म होने के बाद साफसफाई का काम चल रहा था. सफाई कर्मचारी को काउंटिंग सेंटर में बने टायलेट से एक बैग मिला. इस बैग में सिक्के भरे थे. कर्मचारी ने तुरंत इस की जानकारी श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र के महासचिव चंपत राय को दी. इस के बाद चंपत राय ने अपने स्तर पर तुरंत जांच की. जो लोग उस दिन काउंटिग में थे, उन में से 6 लोगों पर शक की सूई टिक गई.






