कलाकार: सुनील शेट्टी, ईशा देओल, राहुल देव, करनवीर शर्मा, बरखा बिष्ट, सिद्धार्थ शेखर, मिहिर आहूजा, गार्गी सावंत
प्लेटफार्म: अमेजन मिनी टीवी
अवधि: लगभग आधे घंटे के 8 एपिसोड्स
निर्देशक: प्रिंस धीमान, आलोक बत्रा
कार्यकारी निर्माता: अक्षय वलसांगकर, आशीष मेहरा, अनुरोध गुसान
प्रोड्यूसर: विक्रम मेहरा, सिद्धार्थ आनंद कुमार, साहिल शर्मा
छायांकन: जेसिल पटेल
वेब सीरीज ‘हंटर टूटेगा नहीं तोड़ेगा’ प्रिंस धीमान और आलोक बत्रा के निर्देशन में बनी है. सीरीज कटियाल के उपन्यास ‘द इनविजिबल वूमेन’ पर आधारित है. यह बौलीवुड की एक ऐक्शन फिल्म की तरह है. वेब सीरीज 8 एपिसोड में जारी की गई है. सीरीज की कहानी में कोई दम नहीं है. इस के कारण जो दृश्य फिल्माए गए हैं, उन में 1-2 को छोड़ कर बाकी सब बकवास हैं.
वेब सीरीज की कहानी में अंगों का व्यापार और देह व्यापार जैसे पुराने घिसेपिटे मामलों को फिल्माने की नाकाम कोशिश की गई है. इस में कत्ल का आरोपी पुलिस अफसर है, उस के पीछे पड़ा एक अन्य पुलिस अधिकारी है, जो विलेन की कमी पूरी करता है. तलाकशुदा पत्नी है. अफेयर है. यह है हंटर की कहानी
सीरीज में एसीपी विक्रम सिंह (सुनील शेट्टी) एक हाईप्रोफाइल महिला लीना थामस के कत्ल के आरोप में फंस जाता है. एसीपी विक्रम गिरफ्तारी से बचने के लिए इधरउधर छिपता है. विक्रम को गिरफ्तार करने में एक दूसरा पुलिस अधिकारी हुड्डा जुटा हुआ है. एसीपी विक्रम का रोल सुनील शेट्टी और लीना थामस का रोल स्मिता जयकर ने निभाया है. जबकि हुड्डा के किरदार में राहुल देव हैं.
विक्रम कानून की गिरफ्त से बचते हुए खुद इस केस को हल करने की कोशिश कर रहा है. इस में उस की मदद एक पुलिस अफसर कर रहा है, जो उस की पूर्व पत्नी स्वाति के साथ रिलेशनशिप में भी है. इसी क्रम में वह दिव्या से मिलता है, जो एक रिपोर्टर है और फिर इस मिशन में उस की सहयोगी बन जाती है.
स्वाति की भूमिका में बरखा बिष्ट है और दिव्या का रोल एशा देओल निभा रही है. शृंखला घिसेपिटे संवादों और उतनी ही खराब संवादों की अदाएगी के लिए एक कीर्तिमान स्थापित कर रही है.
कहानी तो जैसेतैसे इन को मिल गई, लेकिन उसे इतनी बुरे तरीके से फिल्माया गया है कि दर्शकों को बोरियत के सिवा और कुछ हाथ नहीं लगेगा. वेब सीरीज में महिलाओं के काफी सीन ब्रा और छोटे कपड़ों में दिखाए गए हैं. कभी कभी केवल पेंटी पहनती महिला के सीन हैं, जिन का कोई औचित्य नजर नहीं आता.
सीरीज का म्युजिक भी बहुत खराब है. ऐक्शन सीन बहुत ही बोरिंग और बहुत लंबे हैं. यह दुर्भाग्य ही कहा जाएगा कि किसी भी कलाकार ने अपने किरदार के साथ न्याय नहीं किया. सुनील शेट्टी और ईशा देओल तो अभिनय के बारे में बिलकुल अनजान से नजर आए हैं. सुनील शेट्टी इस से पहले एमएक्स प्लेयर की वेब सीरीज ‘धारावी बैंक’ में अंडरवल्र्ड डौन के किरदार में नजर आया था. उस की यह दूसरी सीरीज है.
एपिसोड- 1
पहले एपिसोड की शुरुआत मछली मार्केट से होती है. इमरान नाम का एक गुंडा एक महिला शावा को पीट रहा होता है. एसीपी विक्रम का फोन आता है. कहता है पुलिस आने वाली है, जल्दी भाग जा. इस बीच इमरान धारदार हथियार से गला काट कर शावा की हत्या कर देता है. उस की मां रेशमा को धमकी देता है कि उस का चोरी का माल नहीं मिला तो शावा की बहन का भी यही हाल होगा. इस के बाद वह उस की बहन को उठा कर ले जाता है.
मछली कारोबारी का ऐसा कौन सा सामान एक महिला ने चुरा लिया, जो इस के न मिलने पर हत्या कर दी गई, यह बात फिल्म में कहीं नहीं बताई गई. निर्माता ने खूनखराबे का सीन दिखाने के लिए इसे कहानी में शामिल कर लिया. इमरान नाम के इस गुंडे की ऐक्टिंग में कहीं ऐसी क्रूरता नजर नहीं आई, जैसी कि कातिल में होनी चाहिए. अगले सीन में डीएसपी साजिद एक युवक का पीछा कर रहा होता है.
इंसपेक्टर हुड्डा अचानक आता है और उसी युवक की गोली मार कर हत्या कर देता है. डीएसपी साजिद अकेला होता है और इंसपेक्टर हुड्डा फोर्स के साथ. वेब सीरीज में ऐसा सीन दर्शाया गया है, जिस का कोई मतलब ही नहीं है. डीएसपी साजिद युवक का क्यों पीछा कर रहा है? वह किसी मामले में अपराधी है तथा हुड्डा ने उसे गोली से क्यों उड़ा दिया, यह बात अंत तक भी पता नहीं चल पाई. डीएसपी साजिद का किरदार करणवीर शर्मा ने निभाया है.
दरअसल, एसीपी विक्रम सिंह एक शराबी नशेड़ी उपद्रवी पुलिस अफसर है. इमरान मछली के कारोबार के पीछे अवैध रूप से ड्रग सप्लाई करता है. यह बात विक्रम को पता है. विक्रम उस से ड्रग ले कर नशा करता है. मोटी रकम हासिल करने की खातिर उस की मदद करता है. विक्रम और हुड्डा की मुलाकात होती है और हुड्डा कहता है कि इमरान के सपोर्ट में क्यों खड़ा है. वो तस्कर माफिया है. उसने एक महिला की हत्या की है.
क्यों शुरू हुई मारकाट
यह जानकारी मिलते ही विक्रम अकेला ही इमरान के अड्डे पर पहुंच जाता है. वहां उस के गुंडों से मारपीट व फाइटिंग शुरू हो जाती है. गाना बजने लगता है, ‘सोने की थाली में भोजन परोसा, खाए गोरी का यार बलम तरसे रंग बरसे…’ यह गाने की बैकग्राउंड इस मारकाट के सीन में अर्थहीन है.
इस का सीरीज पर दुष्प्रभाव पड़ता है. जिस तरह से गुंडों की हत्याएं विक्रम को करते दिखाया गया है, उस में रंगमंच पर किए जाने वाले नौटंकी जैसी भी ऐक्टिंग नहीं है. खूब बारिश हो रही है और विक्रम ने इमरान के गुंडों की लाशें बिछा दी हैं. इतनी देर में इमरान भी सामने आ जाता है. दोनों में डायलौगबाजी होती है और फाइटिंग शुरू हो जाती है, जिस में इमरान भी मारा जाता है.
विक्रम को शिवा की बहन मिल जाती है, जिसे बेहोशी की हालत में रस्सी से बांध कर लटका रखा है. वह उसे उतार कर कंधे पर लाद कर इमरान के अड्डे से बाहर निकलता है. सामने ही हुड्डा अपने हमराह सिपाहियों के साथ दिखाई देता है. विक्रम उन के सिपाही को आदेश देता है कि इस लड़की को संभालो. सिपाही लड़की को उठा कर ले चलता है.
हुड्डा धमकी देता है कि तेरी जांच कराऊंगा. तब विक्रम कहता है कि इन हत्याओं में उस का कोई हाथ नहीं है. उस ने तो सिर्फ इस लड़की को बचाया है. वेब सीरीज में इस का यही अंत हो जाता है. आगे इस का कहानी में कोई उल्लेख नहीं है. लाशों के ढेर की न तो कोई जांच होती है और न इस का कहीं जिक्र होता है.
बेमतलब के हौट सीन
अगले सीन में विक्रम एक डाक्टर के पास जाता है. लाशों के ढेर लगाने और बिना जरूरत की फाइटिंग में विक्रम के हाथ में चोट लग जाती है. धारदार हथियार से लगी चोट का इलाज न कर के डाक्टर विक्रम को बताता है कि उस की एक किडनी खराब है. किडनी का औपरेशन कर के जल्द से जल्द बाहर निकलना है.
इस में 10 से 15 लाख रुपए तक खर्च आएगा. इस समय विक्रम के पास पैसा नहीं है. वह समय न होने की बात कह कर औपरेशन को मना कर के वहां से चला जाता है. अगले सीन में स्वाति उसे फोन करती है. घर न आने पर नाराजगी व्यक्त करती है. इस के बावजूद वेब सीरीज का हीरो जिस का चरित्र कहानीकार ने यह दिखाया है कि वह घर न जा कर एक बार में शराब और शबाब का आनंद लेने पहुंच जाता है.
बारबाला पहले से जानती है कि विक्रम नशे का आदी है. विक्रम के असली धंधे के बारे में भी वह जानती है और कहती है कि उसे एक लीना थामस नाम की लेडी की तलाश करनी है. इस के लिए विक्रम को 5 लाख रुपए देने की बात कहती है. रात में शबाब व शराब का आनंद ले कर सुबह का सीन विक्रम के फ्रेश होने का है.
वह फ्रेश हो कर निकलता है. सामने वह हौट कपड़ों में तैयार मिलती है. यहां रोमांस का भी सीन है, जिस का कोई मतलब नहीं है. फिर वह विक्रम के सामने ही कपड़े बदलती है. छोटे कपड़ों में शरीर में से वह अंग साफ दिखाई देते हैं, जिसे बेवजह फिल्माया गया है. फिर उसे ढकती है. 5 लाख रुपए और लीना का फोटो देती है. कहती है कि इसे जल्द से जल्द तलाश करो.
अगले सीन में विक्रम अपने घर पहुंचता है. उसे अपनी बेटी का खयाल आता है, जो इस दुनिया में नहीं है. इतने में उस की पत्नी स्वाति सामने आती है. उस के कपड़ों से दोनों वक्ष झांक रहे होते हैं. क्या फिल्मकार दर्शकों को हौट सीन दिखा कर वेब सीरीज को हिट सीरीज बनाने के प्रयास में है? क्योंकि विक्रम या फिर दर्शकों की नजर पडऩे के बाद वह उन्हें ढकने लगती है.
थोड़ी बातचीत के बाद विक्रम कमरे में ऊपर पहुंचता है, जहां उस की बेटी के फोटो लगे होते हैं. एक फोटो उठा कर देखता है. तभी उसे बेटी खयालों में लिपट जाती है. डायरेक्टर ने इस सीन को इमोशनल बनाने की कोशिश की है, लेकिन उस में सफलता नहीं मिली. यह सीन बहुत ही गंभीर और दिल में उतारने वाला हो सकता था, लेकिन इस सीन का कोई प्रभाव नहीं पड़ा. उस के बाद दोनों नीचे उतर कर आते हैं.
विक्रम घर से बाहर निकल जाता है. स्वाति को अपनी बेटी व पुलिस अफसर साजिद का खयाल आता है, जिस से उस का अफेयर चल रहा है. अगले सीन में विक्रम मिहिर आहूजा यानी हैकर सिदेश के पास पहुंचता है. वहां से लीना का पता ले कर लीना के घर पहुंच जाता है. वहां सिद्धार्थ शेखर यानी डेविड का फोटो देख कर उसे खयाल आता है कि वह इस से कहीं मिला है. स्मिता जयकर यानी लीना थामस से मुलाकात होती है.
थोड़ी देर बातें करने के बाद वह यह बहाना कर के चली जाती है कि वह किसी मीटिंग में जा रही है. शैलेंद्र को उस के पास छोड़ जाती है. विक्रम उस से परिचय पूछता है तो शैलेंद्र बताता है कि वह लीना मैडम व डेविड का काम देखता है. इसी दौरान एक लड़की विक्रम को दिखाई देती है. उस से बात करने पर पता चलता है कि वह लीना थामस पर एक किताब लिख रही है.
अगले सीन में विक्रम के पास एक फोन आता है. वह कहता है तुम्हारा हिसाब चुका दिया है. वह समझ नहीं पाता है. तभी दरवाजे पर दस्तक होती है और 2 युवक घर में दाखिल होते हैं. थोड़ी बात के बाद दोनों में फाइटिंग शुरू हो जाती है और यहां गाना बजता है, ‘चाहे कोई मुझे जंगली कहे, कहने दो कहता रहे…’ विक्रम दोनों को मारता है.
फायरिंग के दौरान विक्रम फ्रिज से एक केला निकाल कर खाता है. दारू पीता है. तब तक दोनों जमीन पर गिरे होते हैं. उन में से एक उठ कर आता है. गोली चलाने से पहले इन दोनों में जो बातचीत हुई है, ये सीन एकदम बकवास है. युवक गोली न चला कर उस की बातों में उलझा रहता है, फिर तीनों गिरे पड़े होते हैं.
विक्रम जब होश में आता है तो उन में से एक युवक के साथ उस का हाथ भी हथकड़ी में बंधा होता है. दोनों के हाथों में हथकड़ी कैसे बंध गई, यह वेब सीरीज में कहीं पता नहीं चला. विक्रम उसे हथकड़ी सहित खींच कर उस स्थान पर ले जाता है, जहां उस का फोन पड़ा है. फोन की घंटी बज रही होती है. वह रिसीव करता है.
इसी बीच पुलिस अफसर साजिद का फोन आता है. वह बताता है कि लीना थामस का मर्डर हो गया है और उस का आरोप तुम्हारे ऊपर आया है. ऐसे सबूत भी मिले हैं. वह कहता है कि हुड्डा आ रहा है. तभी एपिसोड खत्म हो जाता है.