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घटनास्थल पर इलाके के लोगों की अच्छीखासी भीड़ जमा हो गई थी. भीड़ पुलिस वैन को देख कर इधरउधर हट गई. इंसपेक्टर अनीता चौहान अपनी टीम के साथ उस कमरे में आ गईं, जिस में भव्या की लाश पड़ी हुई थी.

भव्या शर्मा के पेट पर चाकू का गहरा घाव था, जिस से खून बह कर फर्श पर फैल चुका था. उस की लाश पीठ के बल पड़ी हुई थी. इंसपेक्टर अनीता चौहान ने लाश का मुआयना किया. मृतका भव्या चेहरेमोहरे से बेहद खूबसूरत थी, उस की उम्र लगभग 35 वर्ष की लग रही थी. उस के शरीर पर जो सलवारकुरती थी, वह अस्तव्यस्त थी. सलवार का नाड़ा ठीक से नहीं बंधा था.

लाश के पास ही खून सना एक तौलिया पड़ा था. इंसपेक्टर अनीता ने इस हत्या की सूचना अधिकारियों को देने के बाद फोरैंसिक टीम और फोटोग्राफर को घटनास्थल पर आने के लिए फोन कर दिया.

पुलिस जुटी जांच में…

थोड़ी देर में पुलिस के अधिकारी और फोरैंसिक टीम फोटोग्राफर के साथ वहां आ गई. आला अधिकारियों ने लाश का निरीक्षण करने के बाद इंसपेक्टर अनीता चौहान को इस केस का हल करने की जिम्मेदारी सौंप दी. अनीता चौहान के सामने कत्ल करने वाले आरोपी विनोद शर्मा का नाम आ गया था. टीपू ने उसी पर अपना संदेह जताया था.

विनोद शर्मा यहां होगा, यह सोचना भी मूर्खता होती. अकसर कत्ल करने के बाद हत्यारा मौके फरार हो जाता है. विनोद शर्मा भी भाग गया होगा. उस की तलाश करने के लिए उस का हुलिया फोटो और उस के घर वालों तथा यारदोस्तों की जानकारी हासिल करना जरूरी था.

भव्या शर्मा मर्डर का खुलासा हो चुका था, अब उस के आरोपी को गिरफ्तार करना बाकी था. इंसपेक्टर अनीता चौहान ने मृतका के भाई टीपू को बुला कर विनोद शर्मा का हुलिया और एक फोटो हासिल किया. आदिल वहीं खड़ा सुबक रहा था. वह उस के पास आ गईं. आदिल 8 साल का हो गया था, वह नासमझ नहीं था. उस से इस हत्या की बाबत बहुत कुछ जानकारी मिल सकती थी.

उन्होंने उस के सिर पर प्यार से हाथ रख कर पूछा, ‘‘तुम्हारे पापा और मम्मी का क्या अकसर झगड़ा होता रहता था?’’

“हां, पापा मेरी अम्मी को मारतेपीटते भी थे. कुछ दिनों से वह रोज अम्मी से लड़ाई कर रहे थे.’’ आदिल ने सुबकते हुए बताया, ‘‘कल भी अम्मी जब इंदौर से लौट कर घर आई थी, पापा उस से लडऩे लगे थे.’’

“किस बात पर लड़े थे तुम्हारे पापा?’’ इंसपेक्टर अनीता ने पूछा.

“पापा कह रहे थे कि अम्मी मेरे असली पापा के साथ इंदौर में क्यों थी?’’

“तुम्हारे पापा यानी अनीस अंसारी? वह तुम्हारी अम्मी के साथ इंदौर गए थे?’’

“मालूम नहीं, अम्मी तो यहां से अकेली ही इंदौर गई थी. हो सकता है मेरे पापा अनीश वहां मिल गए हों?’’

“क्या तुम्हारी अम्मी बाहर जाती रहती थी?’’

“हां, वह दवा खरीद कर उसे बेचने बाहर जाती रहती थी.’’

“तुम्हारे पापा का कल तुम्हारी अम्मी से झगड़ा हुआ था, तब क्या तुम वहां मौजूद थे?’’

“था, लेकिन विनोद पापा ने मुझे सौ रुपए दे कर खिलौना लाने के लिए बाजार भेज दिया. मुझे चाबी वाली कार चाहिए थी, जिस की मैं कई दिनों से जिद कर रहा था. पापा ने रुपए दिए तो मैं बाजार चला गया. जब मैं वापस आया तो अम्मी फर्श पर मरी पड़ी थी, उन के पेट से खून बह रहा था. पापा वहां नहीं थे. मेरे पापा विनोद ने ही मेरी अम्मी को मारा है.’’

आरोपी विनोद की हुई तलाश…

टीपू पास आ गया था. इंसपेक्टर अनीता ने विनोद के घर वालों और उस के खास दोस्तों के विषय में उस से जानकारी ली. टीपू ने विनोद शर्मा का एक एड्रैस और बताया. वह विजय शर्मा का बेटा था जो ईपी-25/16, नई बस्ती, थाना अर्जुन नगर, जिला गुरुग्राम, हरियाणा में रहते थे. आवश्यक काररवाई निपटा लेने के बाद इंसपेक्टर अनीता चौहान ने भव्या शर्मा की लाश पोस्टमार्टम के लिए भिजवा दी.

टीपू के द्वारा वादी के रूप में विजयनगर थाने में उसी दिन भादंवि की धारा 302 के तहत भव्या की हत्या का मामला पंजीकृत कर लिया गया. विनोद शर्मा वांछित अपराधी था. उस के फोटो की कौपियां पुलिस टीम को दे कर उन्हें विनोद की खोज में लगा दिया गया. अनीता चौहान ने अपने खास मुखबिर भी विनोद शर्मा की तलाश में दौड़ा दिए.

गाजियाबाद के बसस्टैंड, रेलवे स्टेशन, ढाबों, होटलों में विनोद शर्मा की तलाश की जाने लगी. पुलिस की एक टीम को उस के पैतृक घर गुडग़ांव भेजा गया. पुलिस की मुस्तैदी और मुखबिरों की भागदौड़ का परिणाम अच्छा ही निकला. 2 दिन बाद एक मुखबिर की सूचना पर पुलिस टीम ने विनोद शर्मा को डीपीएस कट के पास दिन में करीब साढ़े 11 बजे गिरफ्तार कर लिया.

भव्या शर्मा की हत्या 25 दिसंबर, 2022 को रात में की गई थी और 28 दिसंबर, 2022 को दोपहर में विनोद को गिरफ्तार कर लिया गया. यह पुलिस की बहुत बड़ी सफलता थी. विनोद शर्मा को थाना विजयनगर में लाया गया. वह समझ चुका था कि पुलिस ने उस पर हाथ क्यों डाला है. वह अब कुछ भी छिपाना नहीं चाहता था.

अनीता चौहान ने जब उस से सामने बिठा कर पूछताछ शुरू की तो उस ने अपनी पत्नी भव्या शर्मा हत्याकांड के पीछे जो कहानी बताई, वह एक खुद्दार पति के विश्वास और पत्नी के प्रति समर्पण को पूरी तरह ठेस पहुंचाने वाली थी.

इस तरह हुआ अफसाना के घर आनाजाना…

नई बस्ती थाना अर्जुन नगर, गुडग़ांव (हरियाणा) का रहने वाला था विनोद शर्मा. वह दिल्ली से सटे गाजियाबाद में किराए का कमरा ले कर एक फैक्ट्री में काम करता था. शुरू से विनोद को अच्छा पहनने व खाने का शौक था. यहां भी वह जो कमाता था, अपने पहनने खाने पर खर्च कर देता था. कुछ पैसे जोड़ कर उस ने एक स्कूटर खरीद लिया था, उसी से वह अपनी फैक्ट्री आताजाता था.

एक दिन वह अपने काम पर जा रहा था तो उस ने सडक़ किनारे एक बच्चे को रोते हुए देख कर अपना स्कूटर रोक लिया. बच्चे की कुहनी छिली हुई थी, उस में से खून बह रहा था. विनोद ने उस के सिर पर प्यार से हाथ फिराते हुए पूछा, ‘‘क्या हुआ बेटे,

तुम रो क्यों रहे हो?’’

“एक रिक्शे वाला टक्कर मार कर गिरा गया मुझे…’’ बच्चे ने रोते हुए बताया.

“ओह!’’ विनोद ने उसे प्यार से पुचकारा, ‘‘तुम कहां रहते हो?’’

“विजय नगर में. अम्मी मुझे लेने आएंगी.’’

“तुम अपना घर जानते हो?’’

“हां,’’ बच्चे ने सिर हिलाया.

“चलो, पहले मैं तुम्हारी डाक्टर से पट्ïटी करवाता हूं. फिर तुम्हें तुम्हारे घर छोड़ दूंगा.’’

विनोद ने बच्चे को स्कूटर पर बिठाया और एक डाक्टर के पास ले जा कर उस की कुहनी पर पट्टी करवा दी. इस के बाद बच्चे को ले कर उस के द्वारा बताए एक मकान के सामने पहुंच गया.

“यही है मेरा घर,’’ बच्चा स्कूटर से उतर कर बोला. विनोद ने अपने स्कूटर को जब तक स्टैंड पर खड़ा किया, बच्चा दौड़ कर अपने कमरे में चला गया. जब वह बाहर आया तो उस के साथ एक 30-31 साल की सुंदर महिला थी.

“मुझे यह अंकल ले कर आए हैं अम्मी.’’ बच्चे ने अपनी मासूम आवाज में कहा. महिला ने हैरान नजरों से विनोद को देखा,

‘‘आदिल आप को कहां मिल गया, इसे तो स्कूल में छोड़ा था मैं ने?’’

“जी, यह स्कूल के सामने सडक़ पर खड़ा रो रहा था. कोई रिक्शेवाला इसे टक्कर मार गया होगा, कुहनी से खून बह रहा था. मैं ने डाक्टर से पट्टी करवा दी है.’’

“अरे, यह तो मैं ने देखा ही नहीं.’’ महिला घबराए स्वर में बोली और नीचे झुक कर अपने बेटे आदिल की कुहनी देखने लगी.

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