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29 मई, 2023 को सुबहसुबह दोराहा चौकी इंचार्ज देवेंद्र सिंह राजपूत को सूचना मिली कि गांव कनौरा के नजदीक ईदगाह के निकट साबिर हुसैन के गन्ने के खेत में एक औरत की लाश पड़ी हुई है. यह क्षेत्र उत्तराखंड के जिला ऊधमसिंह नगर की बाजपुर कोतवाली के अंतरगत आता है, अत: लाश मिलने की सूचना मिलते ही देवेंद्र सिंह ने तुरंत ही इस की जानकारी बाजपुर कोतवाल प्रवीण सिंह कोश्यारी को दी. उक्त सूचना पर कोतवाल मय फोर्स के घटना स्थल पर पहुंचे.

उस वक्त तक घटनास्थल पर तमाम लोग जमा हो गए थे. मृतक महिला का शव अर्धनग्न अवस्था में पड़ा हुआ था. पुलिस ने घटनास्थल पर पहुंचते ही महिला के ऊपर एक कपड़ा डलवा दिया था. इस के बाद पुलिस ने घटनास्थल का बारीकी से निरीक्षण किया. महिला के सिर पर, गले पर चोट के निशान थे, जिन्हें देखते ही लग रहा था कि उस के साथ कोई जोरजबरजस्ती की गई थी. उस के बाद उस की हत्या की गई थी.

महिला के निचले हिस्से के कपड़े भी फटे हुए पाए गए. जिस के कारण उस के साथ दुष्कर्म की आशंका भी जताई जा रही थी. एक औरत की हत्या की जानकारी मिलते ही काशीपुर के एएसपी अभय सिंह, सीओ (बाजपुर) भूपेंद्र सिंह भंडारी व अन्य पुलिस अधिकारी भी घटनास्थल पर पहुंचे.

सावित्री की हुई हत्या

सब से पहले पुलिस ने मृतक महिला की शिनाख्त कराने की कोशिश की. कुछ ही देर में उस महिला की पहचान भी हो गई. पता चला कि महिला कनौरी निवासी भूप सिंह की पत्नी सावित्री देवी थी. पुलिस ने मृतका के बेटे नरेश को फोन कर के घटनास्थल पर बुला लिया.

पुलिस ने नरेश से जानकारी ली तो उस ने बताया कि वह सुबह ही अपनी गाड़ी ले कर काम पर निकल जाता है. उस की मां राजमिस्त्री के साथ मजदूरी करती थी. उस दिन भी वह हर रोज की तरह से काम पर निकली थी,लेकिन शाम को वह वापस नहीं आई. नरेश ने बताया कि उस ने कई बार उन के मोबाइल पर फोन लगाया, लेकिन वह लगातार बंद आ रहा था. उस के बाद देर रात तक उस ने अपने रिश्तेदारों के साथ मिल कर उसे हर जगह खोजा, लेकिन कहीं भी पता नहीं चला. पुलिस पूछताछ में नरेश ने बताया कि गांव में उस की किसी से कोई दुश्मनी भी नहीं है.

घटनास्थल पर मुआयना करने के बाद पुलिस ने फील्ड यूनिट व डौग स्क्वायड टीम को भी बुला लिया था. जिन के द्वारा घटनास्थल के आसपास निरीक्षण कर सभी सबूत इककट्ठा किए गए. खोजी कुतिया कैटी को मृतका के कपड़े सुंघा कर घटनास्थल पर छोड़ा गया. वह गन्ने के खेत में इधरउधर घूमने के बाद एक राजमिस्त्री ठेकेदार के पास जा कर रुकी. पुलिस ने ठेकेदार के बारे में जानकारी ली तो पता चला कि मृतका उसी ठेकेदार के साथ मजदूरी करती थी.

पुलिस को लगा कि एक साथ काम करने के कारण भी ऐसा हो सकता है. क्योंकि मृतका हर वक्त उसी ठेकेदार के संपर्क में रहती थी. उस के बावजूद भी पुलिस ने उस ठेकेदार को पूछताछ के लिए अपनी कस्टडी में ले लिया था. पुलिस पूछताछ में उस ठेकेदार ने इस मामले से पूरी तरह से जानकारी होने से साफ मना कर दिया था.

ठेकेदार ने बताया कि वह कई दिन से उस के पास काम पर नहीं आ रही थी. उस के बाद महिला एसआई रुचिका चौहान द्वारा संपूर्ण काररवाई को पूरा करते हुए मृतका की लाश का पंचनामा भरने के बाद उस की लाश को सील कर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया गया था.

इस मामले में मृतका सावित्री के बड़े बेटे नरेश की ओर से लिखित तहरीर दी गई. तहरीर के आधार पर पुलिस ने अज्ञात के खिलाफ हत्या का मुकदमा दर्ज कर लिया, जिस की विवेचना इंसपेक्टर प्रवीण सिंह कोश्यारी को सौंपी गई.

4 पुलिस टीमें गठित

सावित्री मर्डर केस की गंभीरता को देखते हुए इस केस को खोलने के लिए 4 टीमों का गठन किया गया था. पहली टीम में सर्विलांस के लिए एसआई भुवनचंद जोशी, कांस्टेबल विनय, दीपक, कैलाश. दूसरी टीम में आसपास में नशा करने वाले संदिग्धों से पूछताछ हेतु व सीसीटीवी फुटेज की जांच करने के लिए एसआई देवेंद्र सिंह राजपूत, विजय सिंह, तीसरी टीम में एसआई भगवान गिरि तथा चौथी टीम में एसएसआई गोविंदा मेहता, एसआई प्रकाश सिंह बिष्ट व कांस्टेबल भूपाल सिंह को शामिल किया गया था.

पुलिस टीमों के गठित होते ही पुलिस ने सब से पहले मृतका के परिवार वालों से पूछताछ की. जिस के द्वारा जानकारी मिली कि मृतक सावित्री देवी पिछले 8-10 साल से सुलतानपट्टी निवासी मकान बनाने वाले ठेकेदार नूर हसन उर्फ नन्हे के साथ काम कर रही थी. दोनों के बीच काफी नजदीकी संबंध भी थे.

28 मई, 2023 को सुबह 9 बजे किसी बात को ले कर दोनों के बीच झगड़ा भी हुआ था. यह जानकारी मिलते ही पुलिस ने नूर हसन को फिर से पूछताछ के लिए हिरासत में लिया. पुलिस ने अपने स्तर से इस मामले को ले कर उस से पूछताछ की तो उस ने इस मामले में किसी भी तरह की जानकारी नहीं दी.

नूर हसन से पुलिस को बताया कि उस ने काफी समय पहले से ही उस के पास से काम छोड़ दिया था. उस के बाद न तो वह उस से कभी मिला और न ही वह उस के पास आई थी. साथ ही उस ने कहा कि वह तो घटनास्थल की तरफ कभी गया भी नहीं. जबकि पुलिस की खोजी कुतिया ने भी सब से पहले पुलिस को चेता दिया था कि मृतका का इस इंसान से नजदीकी का रिश्ता था, फिर भी पुलिस बिना किसी सबूत के नूर हसन को आरोपी साबित नहीं कर सकती थी.

उस के बाद पुलिस टीमें फिर से अपनेअपने कामों में व्यस्त हो गईं. मृतका के निचले हिस्से के कपड़े भी फटे हुए पाए गए थे, जिसे ले कर पुलिस अनुमान लगा रही थी कि कहीं महिला की रेप करने के बाद तो हत्या नहीं कर दी गई. जिस का खुलासा पोस्टमार्टम के बाद ही होना था. इस हत्याकांड के सभी तथ्यों को जोड़ कर एसओजी सहित 5 टीमें लगातार अपनी जांच में लगी हुई थीं.

मोबाइल फोन से मिला सुराग

उसी तहकीकात के दौरान पुलिस को एक खास जानकारी और मिली. पता चला कि सावित्री की हत्या के बाद उस की सहेली सरोज उस के घर वालों से मिलने पहुंची थी. सावित्री की सहेली ने उस के घर वालों को बताया था कि 29 तारीख को उस के मोबाइल पर किसी औरत ने फोन कर के बताया था कि तुम्हारी सहेली सावित्री की हत्या हो गई है. उस की लाश गन्ने के एक खेत में पड़ी हुई है.

सावित्री की हत्या की बात सुनते ही पहली बार तो उसे विश्वास ही नहीं हुआ, लेकिन जब वह तुरंत ही उस के घर पर आई तो उसे पता चला कि सावित्री की किसी ने वाकई में हत्या कर दी है. वह घटनास्थल पर उस की लाश को देखने भी गई. लेकिन वहां पर पुलिस को देख कर वह डर गई.

उस ने वह बात अपने मन ही मन में दफन कर ली थी. उस के बाद यह बात मृतका सावित्री के बेटे ने भी बताई कि उसी दिन उस के मोबाइल पर भी किसी औरत का फोन आया था. उस ने भी उस से यही बात कहीं थी कि उस की मम्मी की हत्या हो गई है. जिस फोन से औरत ने बात की थी, वह भी उस की मम्मी का फोन ही था. लेकिन फोन पर बात करने वाली औरत ने इतनी जानकारी देने के बाद ही मोबाइल बंद कर दिया था.

यह जानकारी मिलते ही पुलिस ने मृतका के मोबाइल को सर्विलांस पर लगा दिया, लेकिन उस के बाद वह मोबाइल लगातार बंद आ रहा था. इस दौरान मोबाइल कई बार खुला और बंद हुआ. उसी दौरान पुलिस को मोबाइल की लोकेशन भी मिल गई थी. मोबाइल की लोकेशन से पुलिस को उस स्थान पर पहुंचने में आसानी हो गई थी.

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