True Crime Story: एक साधारण परिवार की सरिता नायर ने अपनी महत्वाकांक्षाओं की खातिर बड़ेबड़े लोगों तक पहुंच बनाई. यहां तक कि केरल के मुख्यमंत्री ओमन चांडी भी उस की पहुंच से परे नहीं थे. लेकिन इस सब से सरिता नायर को जिल्लत की जिंदगी के अलावा क्या मिला?

कहानी शुरू होती है 1994 से. केरल प्रांत के चेनगन्नूर के शिक्षा विभाग कार्यालय परिसर में एक आयोजन किया जा रहा था, जिस में इस जिले के एक छोटे से गांव की एक लड़की को सम्मानित किया जाना था. उस लड़की की खूबी यह थी कि वह 10वीं क्लास में गांव के स्कूल में अव्वल आई थी और उस का नाम जिले के टौप 10 बच्चों की सूची में था. उस लड़की के साथ एक बड़ी त्रासदी यह हुई थी कि परीक्षा शुरू होने से 2 दिन पहले अचानक उस के पिता का देहांत हो गया था, हालांकि उस दिन सुबह तक वह पूरी तरह स्वस्थ थे.

पिता की मौत उस लड़की के लिए किसी बड़े हादसे से कम नहीं थी. फिर भी उस ने हौसला बरकरार रखते हुए परीक्षाएं दे कर एक मिसाल कायम की थी. इस परीक्षा में उस ने 600 में से 538 (करीब 90 प्रतिशत) अंक हासिल किए थे. उस क्षेत्र  में यह एक कीर्तिमान था. उन दिनों बोर्ड की परीक्षा में इतने अंक हासिल करना किसी आश्चर्य से कम नहीं था. वैसे भी उस लड़की ने विपरीत परिस्थिति में परीक्षा दी थी. शिक्षा विभाग के इस आयोजन में कांग्रेस विधायक सोभना जौर्ज मुख्य अतिथि के रूप में पधारे थे. उन्होंने अपने अभिभाषण में उस लड़की की प्रशंसा करते हुए अन्य विद्यार्थियों को उस से प्रेरणा लेने को कहा था.

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