ज़रा सी भूल ने खोला क़त्ल का राज – भाग 3
  ‘‘बस कोठारी साहब,’’ मयंकमोहन ने इंसपेक्टर की ओर देख कर मुसकराते हुए कहा, ‘‘अब आप खुद अपने खिलाफ सबूत दे चुके हैं. इसलिए अपनेआप को हत्या के जुर्म में गिरफ्तार समझें.’’ क्या सबूत मिल गया था मयंक को?
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