एसएचओ सोलंकी ने उन के कंधे पर सहानुभूति से हाथ रख कर कहा, ‘‘हिम्मत रखिए, आप की दी गई जानकारी से ही हम हत्यारे तक पहुंच कर उसे फांसी के फंदे तक पहुंचा सकते हैं. आप इरफान पर शक जाहिर कर रहे हैं, मुझे उस का पता ठिकाना बताइए.’’
“मैं नहीं जानता साहब, जानता तो अभी तक उसे पकड़ कर सुजीत को लापता करने की वजह पूछ लेता. बड़ी बहू और छोटी बहू ने भी चुप्पी साध रखी है. वही इरफान तक आप को पहुंचा सकती हैं.’’
“ठीक है, मैं संगीता और विमला को थाने बुलवा लेता हूं. देखता हूं कितनी देर तक चुप्पी साध कर रह सकती हैं.’’ एसएचओ सोलंकी ने गंभीरता से कहा और कांस्टेबल सोनवीर, अंकित, अशोक और महिला कांस्टेबल ममता को एसआई चमन सिंह के साथ संगीता और विमला को थाने लाने के लिए भेज दिया. कमलेश्वर सिंह ने उन्हें अपने घर का पता बता दिया था. प्रवीण सोलंकी ने कमलेश्वर सिंह को अपने पास ही रोक लिया था. वह इरफान की उन के घर में घुसपैठ और बहुओं से उस की पहचान के पीछे की कहानी जान लेना चाहते थे.
एक घंटे में ही एसआई चमन सिंह के साथ गई पुलिस टीम कमलेश्वर सिंह की बहुओं संगीता और विमला को थाने ले कर आ गई. वे दोनों काफी डरी हुई लग रही थीं. अपने ससुर को थाने में बैठा देख कर वे दोनों समझ गईं कि ससुर ने उन के विषय में बहुत कुछ बता दिया है. एसएचओ सोलंकी ने दोनों को जलती आंखों से घूर कर देखते हुए कडक़ स्वर में पूछा, ‘‘मुझे मालूम हो गया है कि तुम ने इरफान के साथ साजिश रच कर सुजीत की हत्या करवा दी है.’’
संगीता ने थूक निगला, ‘‘यह झूठ है साहब, जरूर आप को हमारे ससुर ने हमारे खिलाफ उलटा सीधा भडक़ा दिया है.’’
“तुम्हारे ससुर ने अपना बेटा खोया है, तुम दोनों ने क्या खोया? सुजीत 3 दिन से घर नहीं लौटा, तुम दोनों को चिंता नहीं हुई?’’
“चिंता तो बहुत हुई है साहब, लेकिन मैं औरत जात हूं, अपने देवर को कहां जा कर ढूंढती.’’
“क्यों इरफान ने तुम्हें नहीं बताया कि उस ने तुम्हारे देवर सुजीत को पचोली गांव में ले जा कर मार डाला है. इरफान ने तो यह कुबूल कर लिया है कि तुम्हारे कहने पर ही उस ने हत्या की है.’’ थानाप्रभारी सोलंकी ने अंधेरे में तीर चलाया. संगीता के चेहरे का रंग उड़ गया. वह बौखला कर बोली, ‘‘मुझे तो विमला ने सुजीत को रास्ते से हटाने को कहा था साहब. इसी ने ऐसा करने के लिए इरफान को 2 लाख रुपए देना कुबूल किया था.’’
विमला को काटो तो खून नहीं. उस का चेहरा सफेद पड़ गया. वह जेठानी को फाड़ खाने वाली नजरों से देख कर चीख पड़ी, ‘‘तू खुद भी तो चाहती थी कि मेरा पति सुजीत मर जाए. तू अपने पति अजीत को भी इरफान के हाथों खत्म करवाने की फिराक में है, ताकि ससुर की जमीनजायदाद पर ऐश कर सके.’’
“मैं अकेली ऐश करूंगी, तू क्या नहीं करेगी?’’ संगीता भी चीख कर तैश में बोली, ‘‘सुजीत की जगह मैं तुझे मरवा देती तो क्लेश ही खत्म हो जाता.’’
जलालाबाद के सुजीत हत्याकांड का खुलासा अब हो चुका था. एसएचओ सोलंकी और अन्य पुलिस वाले दोनों देवरानीजेठानी द्वारा ही गुनाह कुबूल कर लेने पर मुसकरा रहे थे. उन दोनों को चुप करने के लिए लौकअप में अलगअलग बंद करवा दिया. कमलेश्वर लज्जित सिर झुकाए बैठे थे. दोनों बहुओं ने आज उन के घर की इज्जत को नीलाम कर दिया था. वह सिर उठा कर किसी से बात करने के काबिल नहीं रह गए थे.
लखनऊ जिले के गौसनगर गांव में निवास करता था ठाकुर कमलेश्वर सिंह. उस के पास पुश्तैनी जमीन तो थी ही, वह मैरिज लान का संचालन भी करता था. कमलेश्वर के परिवार में पत्नी के अलावा 3 बेटे अजीत, सुजीत और सुधीर थे. अजीत और सुजीत जवान हो कर पुश्तैनी काम में लग गए तो कमलेश्वर ने रूपापुर (जलालाबाद) के ठाकुर हरपाल सिंह की बेटी संगीता को अजीत के लिए और शाहजहांपुर के गांव लस्करपुर के ठाकुर चंद्रभाल की बेटी विमला को सुजीत के लिए पसंद कर लिया.
संगीता और तांत्रिक के अवैध संबंध ने बिगाड़ा खेल…
वह दोनों बेटों की शादी धूमधाम से कर के लाए तो उन की साख गांव गौसनगर में और ज्यादा बढ़ गई. वह सिर उठा कर गांव में शान से चलने लगे. उन्हें तब नहीं मालूम था कि एक दिन यही दोनों बहुएं उन के मुंह पर ऐसी कालिख पोतेंगी कि वह शरम से पानीपानी हो जाएंगे.
समय का पहिया घूमता रहा. संगीता 2 बेटों की मां बन गई और विमला ने भी 3 बच्चों को जन्म दे कर अपना परिवार पूरा कर लिया. 5-7 साल दोनों के परिवार खुशहाल रहे, लेकिन काम की थकान उतारने के नाम पर जब अजीत और सुजीत ने शराब पीनी शुरू की तो उन के घर में कलह शुरू हो गई. अजीत तो कम पीता था लेकिन सुजीत तो पियक्कड़ था. विमला उस से लड़ती तो ठाकुरों वाला रौब दिखाने के लिए सुजीत विमला को रुई की तरह धुन देता. संगीता पर भी अजीत हाथ छोडऩे लगा था, इस से वह भी दुखी रहने लगी थी.
एक दिन किसी पड़ोसन के कहने पर संगीता अपने पति अजीत और देवर सुजीत को सही राह पर लाने के लिए तथाकथित तांत्रिक इरफान से जा कर मिली. इरफान तंत्रमंत्र विद्या का जानकार था. उस ने दावा किया कि चुटकी बजाते ही उन की परेशानी दूर कर सकता है, ऐसा उस पड़ोसन ने बताया था. कभी उस पड़ोसन ने अपने पियक्कड़ पति को रास्ते पर लाने के लिए इरफान से तांत्रिक अनुष्ठान करवाया था. अनुष्ठान के बाद उस के पति ने पीना छोड़ दी थी.
संगीता अकेली ही जा कर इरफान से मिली और उसे अपनी समस्या बताई तो इरफान ने उसे पति और उस ने देवर का फोटो ले कर दूसरे दिन आने को कह दिया. संगीता दूसरे दिन पति अजीत और देवर सुजीत के फोटो ले कर तांत्रिक इरफान के पास गई तो उस ने अनुष्ठान के बहाने संगीता को हर वीरवार को अपने कार्यालय में बुलाना शुरू कर दिया.
इस बहाने वह संगीता से रुपएपैसे तो ऐंठता ही था, वह संगीता की सुंदरता पर मन ही मन मर मिटा था. 2 बच्चों की मां बन चुकी संगीता 35 वर्ष की हो गई थी, लेकिन अभी उस की जवानी उस पर कायम थी. जब इरफान उसे अनुष्ठान के नाम पर बहाने से छू लेता था तो संगीता की वासना अंगड़ाई लेने लगती थी. इमरान को शह देने के लिए वह उस से और सट जाती. इस से इरफान की हिम्मत बढ़ गई. एक दिन इरफान ने संगीता को बांहों में भरा तो संगीता ने कोई ऐतराज नहीं किया. फिर क्या था, संगीता के तांत्रिक से अवैध संबंध स्थापित हो गए.