कहानी के बाकी भाग पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें

10 अप्रैल की दोपहर को उत्तर प्रदेश (Uttar Pradesh) के बुलंदशहर (Bulandshahar) की शहर कोतवाली पुलिस को टेलीफोन से सूचना मिली कि महिला  सिपाही रूपा तोमर (Lady Constable Rupa Tomar) ने फांसी लगा कर आत्महत्या कर ली है. रूपा कोतवाली में ही तैनात थी और शहर के कृष्णानगर मोहल्ले में सुनील सिंह के यहां किराए पर रहती थी. सूचना पा कर थानाप्रभारी जितेंद्र कालरा पुलिस टीम के साथ मौके पर पहुंच गए. रूपा का शव दुपट्टे के सहारे छत के कुंडे से लटका हुआ था. जिस छोटे से कमरे में रूपा रहती थी उस का हर सामान बड़े सलीके से रखा हुआ था.

पुलिस ने घटनास्थल की जांच की, तो वहां 2-3 लाइन का एक सुसाइड नोट मिला. उस में बड़े ही संतुलित शब्दों में लिखा था, ‘मैं अपनी मरजी से जान दे रही हूं. अपनी मौत की मैं खुद ही जिम्मेदार हूं. इस मामले में किसी से पूछताछ न की जाए.’

थाना प्रभारी ने इस मामले की सूचना पुलिस के वरिष्ठ अधिकारियों को दे दी.

सूचना पा कर एसपी (सिटी) अजय कुमार साहनी और डिप्टी एसपी (सिटी) राकेश कुमार भी मौके पर पहुंच गए. कुंडे पर लटके शव और मौके पर मिले सुसाइड नोट से प्रथमदृष्टया यह मामला आत्महत्या का ही लग रहा था. रूपा का मोबाइल भी वहीं रखा हुआ था. मोबाइल में कुछ मिस काल थीं, जो रात से ले कर सुबह तक आई थीं. इस से अंदाजा लगाया गया कि उस ने रात में ही किसी वक्त अपनी जीवनलीला समाप्त की होगी.

पुलिस ने रूपा का रिकौर्ड देखा तो पता चला कि वह मूलरूप से जिला बागपत के गांव हिलवाड़ी निवासी मांगेराम तोमर की बेटी थी. पुलिस ने उस के घरवालों को सूचना भिजवा दी. रूपा ने 24 घंटे की छुट्टी ले रखी थी. घटना के समय वह छुट्टी पर थी. सवाल यह था कि आत्महत्या करने के लिए क्या उस ने सोचसमझ कर अवकाश लिया था?

rupa-tomar-murder

23 वर्षीया रूपा के अचानक इस तरह आत्महत्या कर लेने से उस के साथी पुलिसकर्मी हैरान थे क्योंकि वह हंसमुख स्वभाव की युवती थी. उस ने ऐसा कभी कुछ जाहिर भी नहीं किया था जिस से लगता कि वह परेशान है. उस की जिंदगी में कोई परेशानी है इस बात का उस ने किसी को संकेत भी नहीं दिया था.

रूपा ने अपने साथियों को बताया था कि एक महीने बाद उस का विवाह होने वाला है. ऐसे में उस ने अचानक ऐसा कदम क्यों उठाया, यह बात किसी की समझ में नहीं आ रही थी. आत्महत्या का कोई स्पष्ट कारण भी नहीं था. ऐसे में यही सोचा गया कि उस ने किन्हीं निजी कारणों से आत्महत्या की होगी. रूपा ने चूंकि किसी को जिम्मेदार नहीं ठहराया था. इसलिए विशेष जांच का कोई औचित्य नहीं था. फिर भी ऐहतियात के तौर पर पुलिस ने फौरेंसिक एक्सपर्ट की टीम को घटनास्थल पर बुलवाया.

इस टीम द्वारा मुआयना कर के मौके से जरूरी नमूने एकत्र किए गए. प्राथमिक काररवाई के बाद पुलिस ने रूपा के शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया और उस के परिजनों के थाने आने का इंतजार करने लगी.शाम तक उस के पिता मांगेराम, चाचा संजीव तोमर व भाई सुनील तोमर बुलंदशहर पहुंच गए. उन से भी पूछताछ की गई.

उन्होंने बताया कि एक महीना पहले ही रूपा की सगाई हुई थी. 16 जून को उस का विवाह होना था. वे लोग विवाह की तैयारियों में जुटे थे. अपने विवाह के लिए वह खुद भी खरीदारी करने वाली थी.

रूपा के घर वाले ऐसी कोई वजह नहीं बता सके, जिस के चलते रूपा हताशा के पायदान पर पहुंच गई हो. उस की साथी महिला पुलिसकर्मियों का भी कहना था कि रूपा अपने विवाह को ले कर खुश थी.

थाने में चूंकि रूपा की राइटिंग मौजूद थी इसलिए पुलिस ने पुष्टि के लिए सुसाइड नोट की राइटिंग का मिलान रूपा की राइटिंग से कर के देखा. उस की राइटिंग सुसाइड नोट से पूरी तरह मेल खा रही थी. इस से स्पष्ट हो गया कि सुसाइड नोट उसी का लिखा हुआ था. उधर 2 डाक्टरों की टीम ने रूपा की लाश का पोस्टमार्टम किया.

पोस्टमार्टम के बाद रूपा के शव को उस के घरवालों के हवाले कर दिया गया. रूपा ने खुद आत्महत्या की थी. न उसे किसी ने उकसाया था और न ही इस के लिए उस ने किसी को जिम्मेदार ठहराया था, इसलिए पुलिस ने जांच बंद कर दी.

police-team-rupa-murder

अगले दिन पुलिस को रूपा की पोस्टमार्टम रिपोर्ट मिली, तो वह चौंकी. रिपोर्ट में साफतौर पर लिखा था कि रूपा की मौत गला दबाने से सांस रूकने के चलते हुई थी. यानि उस की हत्या की गई थी. रिपोर्ट में हत्या का समय 8 से 10 बजे के बीच बताया गया था.

अब यह बात साफ हो गई थी कि रूपा की हत्या करने के बाद उस के शव को दुपट्टे से लटकाया गया था ताकि मामला आत्महत्या का लगे. लेकिन सवाल यह था कि अगर हत्या हुई थी, तो रूपा ने सुसाइड नोट क्यों लिखा? ताज्जुब की बात यह थी कि मौके पर जोर जबरदस्ती के चिह्न भी नहीं थे जिस से यह माना जाता कि किसी ने उस से दबाव में ऐसा कराया होगा.

हकीकत जानने के बाद एसएसपी उमेश कुमार सिंह चौंके. मामला चूंकि उन के ही विभाग की सिपाही की हत्या का था, इसलिए उन्होंने जांच में थाना पुलिस के साथसाथ अपराध शाखा की टीम को भी लगा दिया. पुलिस यह मान कर चल रही थी कि हत्यारा बहुत चालाक है. वह आया और हत्या को आत्महत्या का रूप दे कर चला गया. सुसाइड नोट की लाइन ‘इस बारे में किसी से पूछताछ न की जाए.’ उस ने जानबूझ कर लिखवाई होगी ताकि पुलिस किसी से पूछताछ न कर के इसे आत्महत्या माने और जांच बंद कर दे.

यह बात साफ थी कि हत्यारा रूपा का ही कोई ऐसा जानकार था जिसे अपने कमरे पर आने से वह इनकार नहीं कर सकती थी. दूसरे उसे कोई डर होता तो वह शोर मचाती या किसी को बताती. यहां यह सवाल महत्त्वपूर्ण हो गया कि ऐसा कौन आदमी रहा होगा जो रूपा की मरजी से उस के पास पहुंचा और उस की हत्या कर के चला गया?

पुलिस ने रूपा के घरवालों को बुलवा कर उन से विस्तृत पूछताछ की, तो वे ऐसे किसी व्यक्ति के बारे में नहीं बता सके जिस पर संदेह किया जा सके. उन की खुद भी समझ में नहीं आ रहा था कि रूपा के साथ ऐसा किस ने और क्यों किया.

उन्होंने बताया कि रूपा का रिश्ता मेरठ के कस्बा जानी में रहने वाले राहुल के साथ हुआ था. राहुल सीआईएसएफ में सिपाही था. फिलहाल उस की तैनाती बिहार की राजधानी पटना में थी. राहुल और रूपा के साथसाथ दोनों परिवार भी इस रिश्ते से खुश थे.

रूपा का मोबाइल हत्या का राज खोल सकता था. पुलिस ने उस के मोबाइल नंबर की काल डिटेल्स हासिल कर के उस की छानबीन की तो पता चला कि एक नंबर पर उस की सब से ज्यादा बातें होती थीं. उस नंबर के बारे में उस के घर वालों से पूछा गया तो पता चला वह नंबर राहुल का था.

हत्या वाले दिन और उस से पहले रूपा की राहुल से बराबर बात हो रही थी. जबकि 1 तारीख की दोपहर के बाद दोनों के बीच किसी प्रकार का संपर्क नहीं हुआ था. पुलिस ने राहुल का नंबर मिलाया, लेकिन वह स्विच्ड औफ आ रहा था. इस से पुलिस के शक की सूई राहुल पर जा कर ठहर गई.

और कहानियां पढ़ने के लिए क्लिक करें...