Uttar Pradesh Crime: अमनमणि त्रिपाठी ने घर वालों की मरजी के बिना संभ्रांत परिवार की लड़की सारा सिंह से कोर्टमैरिज तो कर ली लेकिन बाद में ऐसे क्या हालात हुए कि वह उस से किनारा करने की सोचने लगा? फिर एक दिन...

पौ फटते ही सूरज की किरणें धरती को चूमने लगी थीं. चिडि़यों के मधुर कलरव से फिजाएं गूंज उठी थीं. कलियां भी मुसकान बिखरने लगी थीं तो वहीं चंचल मकरंद कलियों पर मंडराने लगे थे. चिडि़यों के मीठे स्वर जब सारा के कानों से टकराए तो वह अंगड़ाइयां लेती हुई बिस्तर से उतरी और तरोताजा होने के लिए गुसलखाने की ओर बढ़ी. कुछ देर बाद वहां से लौटी तो दीवार पर टंगी घड़ी पर नजर दौड़ाई. उस वक्त सुबह के साढ़े 6 बज रहे थे. फिर एक नजर घर में दौड़ाई, घर के बाकी लोग सो रहे थे.

फटाफट तैयार हो कर उस ने नाश्ता किया. उस समय वह बहुत खुश थी. बारबार दीवार घड़ी पर नजर डाल कर वह दरवाजे से ही सड़क की तरफ इस तरह से देखती जैसे उसे किसी के आने का इंतजार हो. दरवाजे से आ कर वह बेचैनी से लौन में चहलकदमी कर ने लगती. उस की जूतियों की खटपट से सारा की मां सीमा सिंह की नींद टूट गई.

बेटी को अलसुबह तैयार हुआ देख कर उन्होंने उस से पूछा, ‘‘बेटी, इतनी जल्दी तैयार हो कर कहां जा रही हो? रात तुम ने मुझे बताया नहीं कि सुबह तुम्हें कहीं जाना है?’’

‘‘जी मां, मैं बताना भूल गई थी. दरअसल बात यह है कि शादी की दूसरी सालगिरह पर अमन ने दिल्ली, चंडीगढ़ और शिमला जाने का कार्यक्रम बनाया है. आज हम पहले दिल्ली जाएंगे. फिर वहां से आगे की तैयारी करेंगे.’’

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