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30 जनवरी, 2017 को पश्चिम बंगाल के बांकुरा जिले से क्राइम ब्रांच की एक टीम भोपाल आई. 5 सदस्यीय इस टीम का नेतृत्व बांकुरा क्राइम ब्रांच के टीआई अमिताभ कुमार कर रहे थे. उन के साथ सबइंसपेक्टर कौशिक हजरत और संदीप बनर्जी के अलावा एएसआई चंद्रबाला भी थीं. इस टीम के साथ एक स्मार्ट और खूबसूरत युवक आयुष सत्यम भी था, जो काफी परेशान लग रहा था.

भोपाल स्टेशन पर उतर कर यह टीम सीधे गोविंदपुरा इलाके के सीएसपी वीरेंद्र कुमार मिश्रा के पास पहुंची और उन्हें सिलसिलेवार सारी बात बता कर अपने आने का कारण स्पष्ट किया. अमिताभ ने वीरेंद्र मिश्रा को बताया कि एक युवती आकांक्षा शर्मा जोकि उन के साथ आए आयुष सत्यम की बड़ी बहन है, रहस्यमय तरीके से गायब है.

उस के घर वालों ने 5 जनवरी को उस की गुमशुदगी की रिपोर्ट लिखाई है. उन लोगों ने उदयन दास नाम के एक युवक पर संदेह व्यक्त किया है. पश्चिम बंगाल की पुलिस टीम ने यह भी बताया कि आकांक्षा का मोबाइल चालू है और उस की लोकेशन भोपाल के साकेतनगर की आ रही है.

अमिताभ कुमार ने यह भी बताया कि 28 वर्षीय आकांक्षा ने जयपुर के नजदीक स्थित वनस्थली से एमएससी इलैक्ट्रौनिक्स से डिग्री ली थी. उस के पिता शिवेंद्र शर्मा यूनाइटेड बैंक औफ इंडिया में चीफ मैनेजर हैं. जून 2016 में आकांक्षा ने घर वालों को बताया था कि अमेरिका में उस की जौब लग गई है और वह अमेरिका जा रही है. पासपोर्ट बनवाने की बात कह कर वह दिल्ली चली गई थी. इस के पहले कुछ दिनों तक वह दिल्ली की एक कंपनी में नौकरी भी कर चुकी थी.

आजकल के युवाओं के लिए विदेश में नौकरी करना अब कोई बहुत बड़ी बात नहीं रह गई है. ज्यादातर अभिभावकों की तरफ से उन्हें कैरियर चुनने के मामले में छूट मिली होती है. 24 जून, 2016 को आकांक्षा नौकरी के लिए कथित रूप से न्यूयार्क चली गई थी. जुलाई तक तो वह फोन पर घर वालों से बातें करती रही, लेकिन फिर व्यस्तता का बहाना बना कर उन्हें टालने लगी थी. मोबाइल फोन पर घर वालों से उस की आखिरी बार बात 20 जुलाई को हुई थी.

इस के बाद आकांक्षा ने वायस काल करना बंद कर दिया और मैसेज के जरिए चैट करने लगी थी. इस से शिवेंद्र शर्मा को तसल्ली तो थी लेकिन पूरी तरह नहीं. उन्हें बेटी को ले कर कुछकुछ आशंकाएं भी होने लगी थीं. उन की परेशानी तब बढ़ी जब मैसेज के जरिए भी बात होना बंद हो गया. इस पर उन्होंने 5 जनवरी, 2016 को बांकुरा थाने में आकांक्षा की गुमशुदगी की रिपोर्ट लिखवा दी.

दरअसल, बात उतनी मामूली भी नहीं थी, जितनी दिख रही थी. शिवेंद्र और उन का बेटा अपने स्तर पर आकांक्षा को ढूंढ रहे थे. जब कहीं से कोई सुराग नहीं मिला तो पुलिस ने अपनी साइबर सेल के जरिए आकांक्षा के मोबाइल फोन की लोकेशन ट्रेस की. पता चला उस के फोन की लोकेशन भोपाल की आ रही है.

इस के कुछ दिन पहले शिवेंद्र शर्मा एक उम्मीद ले कर भोपाल आए थे. मोबाइल फोन पर हुई बात के आधार पर वह उदयन के घर एमआईजी 62, सेक्टर-3ए, साकेतनगर, भोपाल पहुंचे और उस से आकांक्षा के बारे में पूछताछ की. उदयन को वह पहले से जानते थे क्योंकि वह आकांक्षा का खास दोस्त था.

उदयन ने यह तो नहीं कहा कि वह आकांक्षा को नहीं जानता, लेकिन गोलमोल बातें बना कर वह शिवेंद्र शर्मा को टरकाने में जरूर कामयाब रहा था. शिवेंद्र शर्मा को उदयन की बातों पर पूरी तरह विश्वास नहीं हुआ था, लेकिन वह कर ही क्या सकते थे.

शिवेंद्र शर्मा को मायूस लौटाने के बाद उदयन का माथा ठनकने लगा था. कुछ दिन बाद वह सीधे कोलकाता स्थित शिवेंद्र के घर जा पहुंचा और 2 दिन तक वहीं रुका. आकांक्षा के बारे में शिवेंद्र और उन की पत्नी शशिकला की चिंता का भागीदार बन कर उस ने उन्हें भरोसा दिलाया कि आकांक्षा चूंकि उस की अच्छी फ्रैंड है, इसलिए वह उसे ढूंढने में उन की हरसंभव मदद करेगा.

उसी दौरान शिवेंद्र ने यह महसूस किया कि उदयन असामान्य व्यवहार कर रहा है और उन के घर आने के बाद ठीक से सोया भी नहीं है. इस से उन का शक यकीन में बदल गया कि जरूर कोई गड़बड़ है. यह उन के लिए एक और संदिग्ध बात थी कि उदयन बेवजह शशिकला से जिद करता रहा था कि किचन में जा कर वह खुद चाय बनाएगा. जाहिर है सहज होने की कोशिश में उदयन कुछ ज्यादा ही असहज हो गया था. यह बात शर्मा दंपति से छिपी नहीं रह सकी थी.

खूबसूरत, बिंदास और महत्त्वाकांक्षी आकांक्षा और उदयन के इस कनेक्शन को ले कर बांकुरा और भोपाल पुलिस के बीच लंबी मंत्रणा हुई, जिस का निष्कर्ष यह निकला कि कहीं कुछ गड़बड़ जरूर है. इस गड़बड़ का पता लगाने के लिए पुलिस टीम ने जो योजना तैयार की, उस का पहला चरण उदयन के बारे में खुफिया तरीके से जानकारियां इकट्ठा करने के साथसाथ उस की निगरानी करना भी था.

31 जनवरी और 1 फरवरी को पुलिस टीम ने उदयन की रैकी की. इस कवायद में पुलिस को जो जानकारियां मिलीं, वे चौंका देने वाली थीं. उदयन अड़ोसपड़ोस में किसी से भी मिलताजुलता नहीं था. अलबत्ता वह बेहद विलासी जिंदगी जी रहा था. उस के पास महंगी कारें औडी और मर्सिडीज थीं. पुलिस वालों को उस की जिंदगी और हरकतें हद से ज्यादा रहस्यमय लगीं. साकेतनगर वाला मकान, जिस में वह रहता था, उस का नीचे का हिस्सा उस ने ब्रह्मकुमारी आश्रम को किराए पर दे रखा था.

इन 2 दिनों में वह अपनी एक गर्लफ्रैंड पूजा अटवानी के साथ ‘काबिल’ और ‘रईस’ फिल्में देखने सिनेमा हौल गया था. पुलिस वालों ने दोनों फिल्में उस के पीछे वाली सीट पर बैठ कर देखी थीं, जिस की उसे भनक तक नहीं लगी थी.

2 फरवरी को पुलिस वाले जब उस के घर पहुंचे तो ताला बाहर से बंद था, लेकिन उदयन अंदर मौजूद था. ताला बंद होने के बावजूद पुलिस वालों ने दरवाजा खटखटाया तो अंदर किसी के होने की आहट मिली. किसी अनहोनी से बचने के लिए बांकुरा पुलिस टीम ने गोविंदपुरा थाने से भी पुलिस बुला ली. उदयन अंदर है, पुलिस यह जान चुकी थी. उसे पकड़ने के लिए गोविंदपुरा थाने के एएसआई सत्येंद्र सिंह कुशवाहा छत के रास्ते से हो कर नीचे गए और उदयन का हाथ पकड़ कर उस से मुख्य दरवाजा खुलवाया.

पुलिस टीम जब अंदर दाखिल हुई तो वहां का नजारा देख चौंकी. कमरों का इंटीरियर बहुत अच्छा था, हर कमरे में एलसीडी लगे थे पर पूरा घर अस्तव्यस्त पड़ा था. ऐसा लग रहा था जैसे वहां मुद्दत से साफसफाई नहीं की गई है. पुलिस ने उदयन से आकांक्षा के बारे में पूछा तो वह खामोश रहा.

पहली मंजिल पर चबूतरा बना देख पुलिस वालों का चौंकना स्वाभाविक था. कमरों में सिगरेट के टोंटे पड़े थे. साथ ही शराब की खाली बोतलें भी लुढ़की पड़ी थीं. सिगरेट के टोंटों की तादाद हजारों में थी. कुछ प्लेटों में बासी सब्जी व दाल पड़ी थी, जिन से बदबू आ रही थी.

जैसेजैसे पुलिस टीम घर को देख रही थी, वैसेवैसे रोमांच और उत्तेजना दोनों ही बढ़ती जा रही थीं. हर कमरे की दीवार पर लव नोट्स लिखे हुए थे, जिन में आकांक्षा के साथ बिताए लम्हों का जिक्र साफ दिखाई दे रहा था. कुछ देर घर में घूमने के बाद पुलिस ने जब उदयन से दोबारा पूछा कि आकांक्षा कहां है तो उस ने बेहद सर्द आवाज में जवाब दिया, ‘‘मैं ने उस का कत्ल कर दिया है और वह इस चबूतरे के नीचे है.’’

मकसद में इतनी जल्दी और आसानी से कामयाबी मिल जाएगी, यह बात पुलिस टीम की उम्मीद से बाहर थी. एक बम सा फोड़ कर उदयन खामोश हो गया. उस के चेहरे पर कोई शिकन या घबराहट नहीं थी. आकांक्षा की हत्या कर के उदयन ने उस की लाश दफना दी थी, यह जान कर पुलिस वालों ने उस पर सवालों की झड़ी लगा दी. इस के बदले उदयन ने जो जवाब दिए, उन से सिलसिलेवार यह कहानी सामने आई.

                                                                                                                                       क्रमशः

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