Hindi Story: विदेशों से मंगाए जाने वाले महंगे और भारीभरकम रोबोट को देखते हुए भारतीय इंजीनियर दिवाकर वैश ने 2 फुट ऊंचा और 2 किलोग्राम वजन का ऐसा रोबोट बनाया है, जो इंसानों की तरह अपनी फीलिंग भी देगा.
रोबोट का नाम सुनते ही हमारे दिमाग में मानवरूपी ऐसी मशीन का चित्र उभर आता है, जिन की कमांड कंप्यूटर या रिमोट में होती है. रिमोट का बटन दबाते ही वह वे काम करने लग जाता है, जो बटन दबाने वाला चाहता है. चलतीफिरती यह मशीन (रोबोट) आज विभिन्न क्षेत्रों में बहुपयोगी साबित हो रही है.
सन 1961 में अमेरिका की एविंग टाउनशिप स्थित जनरल मोटर्स के प्लांट में जब दुनिया का पहला भारीभरकम रोबोट बना था, तब किसी ने कल्पना भी नहीं की थी कि आगे चल कर यह इंसानी जिंदगी में कितना महत्त्वपूर्ण साबित होगा. तब से ले कर अब तक समय और जरूरत के हिसाब से इस के वजन, क्षमता, डिजाइन आदि में अनेक बदलाव हुए हैं. और तो और अब भारतीय इंजीनियरिंग संस्थानों में भी शोध के लिए इन की ऐसी जरूरत बन चुकी है कि इन्हें विदेशों से मंगाना पड़ता है.
लेकिन अब इन्हें बाहर से मंगाने की जरूत नहीं है, एक भारतीय इंजीनियर ने देश में ही एक ऐसे रोबोट का निर्माण किया है, जो न सिर्फ इंसानों की तरह सोचेगा, बल्कि सामने बैठे इंसान के दिमाग को पढ़ कर उसी के अनुसार काम भी करेगा. दिल्ली के करोलबाग स्थित ए-सेट इंस्टीट्यूट के इंजीनियर दिवाकर वैश ने थ्री डी प्रिंटर की तकनीक से अपने ही मानव रोबोट का अपडेट वर्जन मार्क-टू तैयार किया है. मात्र 2 किलोग्राम वजन का इन का बनाया हुआ यह रोबोट न केवल डांस करेगा. बल्कि इंसानों की तरह ही सोचेगा. मार्क-2 से पहले इन्होंने ही अपनी लैब में मानव नाम का रोबोट बनाया था.






