Jinnah Love Story: पाकिस्तान के जनक जिन्ना को भले ही कट्टर माना जाता हो, लेकिन उन के अंदर एक प्यारभरा दिल भी था जो रत्ती यानी रतनबाई के लिए धड़कता था. दोनों में प्यार भी हुआ, परवान भी चढ़ा. लेकिन शादी के बाद...
बात सन 1938 की है. सांप्रदायिक राजनीति पूरे उफान पर थी. इस दौरान मोहम्मद अली जिन्ना देश के सब से बड़े मुसलिम नेता के तौर पर उभर रहे थे. ऐसे नाजुक मौके पर उन की बेटी दीना ने एक गैरमुसलिम युवक नेविल वाडिया के साथ शादी की इच्छा प्रकट की तो जिन्ना का उत्तर अप्रत्याशित नहीं था. उन्होंने पिता के अधिकार से कहा, ‘‘हिंदुस्तान में तुम्हारे लायक लाखों मुसलिम लड़के हैं. उन में से तुम किसी को भी चुन सकती हो.’’
लेकिन दीना अपनी जिद्दी मां और उस से भी ज्यादा अपने जिद्दी पिता की संतान थी. इसलिए उस ने जो जवाब दिया, वह जिन्ना के लिए भी अप्रत्याशित था. दीना ने कहा, ‘‘डैडी, हिंदुस्तान में लाखों मुसलमान लड़कियां थीं, फिर भी आप ने उन में से किसी से शादी नहीं की.’’
जिन्ना को अपनी लाडली एकलौती बेटी के जवाब ने लाजवाब कर दिया. लेकिन वह अपनी बेटी केइशारे को समझ गए थे. उन्होंने कल्पना भी नहीं की थी कि 20 साल पहले का उन के अपने जीवन का इतिहास इतनी जल्दी स्वयं को दोहराएगा. उन्होंने भी पारसी खानदान में जन्मी रतनबाई उर्फ रत्ती से प्यार किया था और सारे जमाने से लड़ कर उस से शादी की थी. बहुत अनोखी, मगर बहुत ट्रैजिक थी उन की प्रेम कहानी.
रतनबाई पेटिट का जन्म सन 1900 में मुंबई के समृद्ध और प्रतिष्ठित पारसी पेटिट परिवार में हुआ था. पेटिट परिवार मुंबई के पेडर रोड पर एक विशाल बंगले में रहता था. परिवार के कई बंगले पुणे दार्जिलिंग और कई रमणीक स्थानों पर थे. रत्ती आकर्षक और प्रतिभाशाली लड़की थी. कला और साहित्य में उस की गहरी दिलचस्पी थी. वह देश के स्वतंत्रता संग्राम की लहर से भी अछूती नहीं थी. परिवार में उस जमाने में कई राजनीतिज्ञों और नेताओं का आनाजाना लगा रहता था. रत्ती उन की बातचीत, बहस और चर्चाएं अकसर सुनती रहती थी.






