Hindi Story: देवेश वर्मा एक ऐसा शातिर ट्यूटर था, जो अपने प्रोफेशन की आड़ में ड्रग्स बेचने का धंधा करता था. वह ट्यूशन पढऩे आने वाली धनाढ्य परिवार की लड़कियों को ड्रग मिली चौकलेट खिला कर नशे का गुलाम बना देता था. इस के बाद उन्हें मोटी रकम में चौकलेट बेचता. इच्छा भी उस के जाल में फंस चुकी थी. इस जाल से निकलने के लिए इच्छा ने अपनी फ्रेंड ङ्क्षरकी के साथ मिल कर ऐसी चाल चली कि…

”इच्छा… ओ इच्छा… अरे अभी उठी कि नहीं? घड़ी देख, 7 बज गए हैं. अब जल्दी से उठ जा.’’ इच्छा की मम्मी सोनालिका इस तरह चिल्लाईं मानो इच्छा के नाम की माला जप रही हों, लेकिन सुबहसुबह इच्छा को मम्मी की आवाज कौवे की आवाज की तरह कर्कश लगती थी. केवल उस का नाम ही इच्छा था. बाकी कुछ भी उस की इच्छा से नहीं होता था. पूरी रात उस के सिर का बोझ उठाने वाले तकिए में इच्छा ने सिर डाल दिया. पर यह क्या, मम्मी की आवाज इतनी तेज थी कि उस ने तकिए को बेध कर उस के कानों के परदे को हिला दिया.

इतने पर भी उस की मम्मी को तसल्ली नहीं हुई. वह दरवाजा पीटते हुए बोलीं, ”इच्छा, उठ जा अब. तुझे उठाने के अलावा मुझे और भी बहुत सारे काम हैं.’’

इतना सुन कर इच्छा ने चादर किनारे फेंकी और दोनों पैर हवा में उछाल कर बिस्तर पर ही बैठ गई. पर दिल में अभी भी एक उम्मीद थी कि शायद मम्मी ऊब कर चली जाएंगी तो थोड़ा और सोने को मिल जाएगा. उस दिन रविवार था. इसी एक दिन तो थोड़ा शांति से सोने को मिलता था. पर उस की मम्मी को उस दिन भी संतोष नहीं होता था. उन्होंने जोर से दरवाजे पर मुक्का मारा. इच्छा ने उठ कर दरवाजा खोला, ”शांत मम्मी. अब मैं उठ गई हूं.’’

सोनालिका दरवाजा ठेल कर अंदर आईं. इच्छा उठ जरूर गई थी, पर अभी उस की आंखें ठीक से खुली नहीं थीं.

वह आंखें खोलने की कोशिश कर रही थी कि तभी मम्मी ने उस का बायां कंधा पकड़ कर झकझोरा. वह कुछ समझ पाती, मम्मी दांत भींच कर चीखीं, ”ये कैसे कपड़े पहने हैं इच्छा तूने? यह मत भूल कि इस घर में तेरे पापा भी हैं.’’

”पर मम्मी, मैं रात को अंदर से दरवाजा बंद कर के सोती हूं.’’

”कभी रात को किसी की तबीयत खराब हो जाए तो..?’’

इच्छा जानती थी कि मम्मी का यह बेकार का बहाना है. इसलिए अपना हाथ छुड़ा कर वह अपने बाथरूम की ओर जाते हुए बोली, ”मम्मी, आप यह क्या फालतू की बातें सोचती रहती हैं.’’

इतना कह कर इच्छा बाथरूम में घुस गई. पीछे से उस की मम्मी ने कहा, ”बेटा, फालतू बात नहीं है, तू समझने की कोशिश कर.’’

”मम्मी, अब बस कीजिए. 8 बजे मुझे ट्यूशन जाना है देवेश सर के यहां.’’ बाथरूम के अंदर से इच्छा चिल्लाई.

”तो क्या अब हमेशा की तरह देवेश घर पर ट्यूशन पढ़ाने नहीं आएगा?’’

”मम्मी, आज रविवार है न, इसलिए एक्स्ट्रा क्लास के लिए उन्होंने घर बुलाया है.’’

”पर मुझ से तो इस बारे में उस ने कुछ नहीं कहा.’’

”मम्मी उन्होंने मुझे रात को मैसेज कर के कहा था.’’

”अच्छा, तो तुम दोनों देर रात तक चैट करते रहते हो?’’ आंखें चौड़ी कर के सोनालिका ने कहा.

”मम्मी जरा सोचिए, देवेश सर मैच्योर हैं. वह मुझे देर रात को क्यों मैसेज करेंगे.’’

”तब कल रात 2 बजे तक तुम्हारी लाइट क्यों जल रही थी?’’ मम्मी ने पूछा.

”मम्मी, मेरा काम छूटा हुआ था, मैं उसी को पूरा कर रही थी. अच्छा, अब आप जाइए, वरना मुझे ट्यूशन के लिए देर हो जाएगी.’’

किसी तरह मम्मी को भेज कर इच्छा देवेश के बारे में सोचने लगी. तभी फोन की घंटी बज उठी. इच्छा ने दौड़ कर फोन उठाया. वह कौल देवेश की थी. कौल रिसीव करते ही देवेश की आवाज आई, ”तुम 8 बजे आ रही हो न मेरे घर, कहीं भूल तो नहीं गई?’’

”नहीं सर, मैं आप के घर आना भला कैसे भूल सकती हूं. मैं 8 बजे आ रही हूं आप के घर.’’

”ठीक है, आओ. मैं तुम्हारा इंतजार कर रहा हूं.’’ कह कर देवेश ने कौल काट दिया.

जिस तरह इच्छा देवेश के प्रेमजाल में फंसी थी, उसी तरह उस का निचला होंठ दोनों दातों के बीच फंस गया था. उस की नजरें मोबाइल में देवेश के फोटो पर जमी थीं, तभी स्क्रीन पर फ्रेंड रिक्वेस्ट का एक नोटिफिकेशन उभरा. ‘किस की फ्रेंड रिक्वेस्ट है?’ इच्छा ने सोचा.

इच्छा को लगा कि यह तो बहुत उतावलेपन में है. अभी रिक्वेस्ट एक्सेप्ट की नहीं कि मैसेज भी आने लगे. सुबहसुबह इस तरह फालतू कौन बैठा है. अब इसे कैसे समझाए कि अभी तुरंत उसे देवेश सर के यहां जाना है. उसे लगा कि एक बार देख तो ले कि यह महाशय कौन हैं? उस की प्रोफाइल की फोटो के दर्शन तो कर ले. प्रोफाइल देख कर इच्छा बड़बड़ाई, ‘अरे यह तो लड़की लगती है. प्रोफाइल में नाम तो रिंकी ही लिखा है. उस के मुंह से निकला, ‘हाय! मेरे इतने खराब दिन आ गए कि लड़कों के बजाय लड़कियां फ्रेंड रिक्वेस्ट भेजने लगीं हैं?’

उस ने इनबौक्स खोला. रिंकी ने मैसेज भेजा था, ‘आज देवेश सर के घर ट्यूशन पढऩे जाने की गलती मत करना इच्छा. —तेरी शुभचिंतक रिंकी.’

इच्छा को लगा कि रिंकी उस से मजाक कर रही है. उस ने उस मैसेज को महत्त्व न देते हुए फोन को चार्ज करने के लिए लगाया और नहाने चली गई. नहा कर इच्छा बाहर आई तो अलमारी खोल कर कपड़े देखने लगी. आज पहली बार वह देवेश के यहां जा रही थी, इसलिए वह ऐसे कपड़े पहनना चाहती थी, जिन में वह खूब सुंदर लगे.

उस ने एक बढिय़ा सी स्कर्ट और स्लीवलेस टीशर्ट पहनी. इस तरह के कपड़ों में मम्मी उसे देवेश के यहां न जाने देतीं, इसलिए उस ने शार्ट स्कर्ट के ऊपर ओवरलैप स्कर्ट बांध ली. ऐसा उस ने पहली बार नहीं किया था. ऐसा तो वह लगभग रोज ही करती थी. कमरे से बाहर आ कर उस ने कहा, ”मम्मी काफी देर हो गई है. मैं जा रही हूं बाय.’’

”नाश्ता तो करती जा इच्छा, तैयार है.’’

चप्पल पहनते हुए इच्छा बोली, ”नहीं मम्मी, मुझे भूख नहीं है.’’

”नाश्ता नहीं कर रही तो कोई बात नहीं बेटा. ये लो रुपए, बाहर अपनी फ्रेंड के साथ नाश्ता कर लेना.’’ इच्छा के पापा ने बुला कर कहा.

”जी पापा,’’ कहते हुए इच्छा पापा के पास पहुंची.

”इतना पैसा केवल नाश्ता करने के लिए?’’ इच्छा की मम्मी बड़बड़ाईं.

उन की ओर ध्यान दिए बगैर इच्छा दरवाजा खोल कर बाहर निकल गई. सड़क पर आते ही उसे औटो मिल गया. पहुंच कर औटो वाले को पैसे दे कर उस ने वाचमैन से देवेश का पता पूछा और लिफ्ट में पहुंची. धीरे से उस ने ओवरलैप स्कर्ट उतारी और खुद को लिफ्ट में लगे आईने में देखा.

सचमुच वह बहुत खूबसूरत लग रही थी. लिफ्ट रुकी तो बाहर आ कर उस ने ओवरलैप स्कर्ट बैग में ठूंसी और देवेश के फ्लैट की घंटी बजा दी. देवेश ने दरवाजा खोला और अंदर आने के लिए कहा. इच्छा सोफे पर बैठ कर देवेश के घर का जायजा लेने लगी, तभी देवेश हाथ में पानी का गिलास थामे उसे एकटक ताकते हुए बोला, ”इच्छा, पानी…’’

इच्छा सोफे पर पैर पर पैर चढ़ाए बैठी थी. उसे लगा कि एक तो छोटी स्कर्ट, दूसरे वह असभ्य तरीके से बैठी है, इसलिए उस ने जल्दी से पैर नीचे किया. देवेश ने उसे उसी तरह ताकते हुए कहा, ”इच्छा, तुम ठीक तो हो न, तुम्हारी आंखें इतनी लाल..?’’

इच्छा की आंखें अपने आप चौड़ी हो रही थीं, सांस भी अस्थिर और अलग तरह से चल रही थी. उसे अहसास भी कुछ अलग तरह का हो रहा था. इच्छा की समझ में आ गया कि उसे देवेश सर की चौकलेट की आदत पड़ गई है, जो आज उस ने समय से नहीं खाई है. इसलिए उस ने हिम्मत कर के कहा, ”सर, प्लीज मुझे एक चौकलेट दीजिए न, अब मुझ से यह बेचैनी सहन नहीं हो रही है.’’

”पर वह चौकलेट तो खत्म हो गई है इच्छा.’’ देवेश ने किचन की ओर जाते हुए कहा.

इच्छा की समझ में नहीं आ रहा था कि आखिर वह कैसी चौकलेट है, जो उस के शरीर और दिमाग पर हावी होती जा रही है. उस ने गिड़गिड़ाते हुए कहा, ”प्लीज सर, मेरी मदद कीजिए. मुझे बहुत तकलीफ हो रही है.’’

”तुम रोजाना जो चौकलेट खाती थी, वह तो नहीं है. यह दूसरी चौकलेट है, पर थोड़ी महंगी है.’’ जेब में हाथ डालते हुए देवेश ने कहा.

”महंगी है, सर मैं कुछ समझी नहीं.’’

”मैं भी इसे खरीद कर लाता हूं. मुझे फ्री में थोड़े ही मिलती है.’’

”कितने की है?’’इच्छा ने पूछा.

”केवल 5 हजार रुपए की.’’

”5 हजार…’’ इच्छा ने हैरानी से कहा.

इच्छा के शरीर में जैसे जान ही नहीं रह गई थी. उस ने किसी तरह पर्स से मुट्ठी में पैसे निकाले और देवेश की ओर बढ़ाते हुए कहा, ”सर, ये लीजिए पैसे और मुझे चौकलेट दीजिए.’’

”गिन तो लो इन्हें. ज्यादा तो नहीं हैं?’’ देवेश ने कहा.

”सर, आप गिन लीजिए. मुझे चौकलेट चाहिए बस.’’

पैसे ले कर देवेश ने एक चौकलेट इच्छा को थमा दी. इच्छा ने चौकलेट खाई तो उसे शांति का अहसास हुआ. उस का अकड़ रहा शरीर ढीला होने लगा. वह देवेश के कमरे में पड़े सोफे पर सीधी लेट गई.

उस की आंखों के सामने फैन घूम रहा था. उस की समझ में नहीं आ रहा था कि वह सपना देख रही है या हकीकत है. क्योंकि उसे एक अजीब स्पर्श का अनुभव हो रहा था. वह स्पर्श उस के घुटनों की ओर बढ़ रहा था. वह देखना चाहती थी कि यह कैसा स्पर्श है, पर उस का सिर उठ ही नहीं रहा था. आंखों के सामने भी धुंध सी छा गई थी.

इच्छा के अंगों पर देवेश के हाथ खेल रहे थे. इच्छा को पता नहीं चल रहा था कि उस के साथ यह क्या हो रहा है. पर जो भी हो रहा था, उस से उसे अद्ïभुत आनंद मिल रहा था. उस के शरीर पर जैसे कोई भारी चीज लद गई है, इस अहसास के साथ उस की पलकें जैसे एकदूसरे से चिपक गईं. इस के बाद इच्छा की आंखें खुलीं तो उस ने देखा कि उस के एक ओर जेसिका तो दूसरी ओर देवेश बैठा था. जेसिका ने इच्छा को बताया कि उस के आने के 10 मिनट बाद ही वह आ गई थी.

अपनी हालत और अस्तव्यस्त कपड़े देख कर उसे समझते देर नहीं लगी कि उस के साथ क्या हुआ था. गुस्से में उस ने पर्स से मोबाइल निकाला और उस ने पुलिस कंट्रोल रूम का 112 नंबर डायल किया. यह देख कर उस के बगल में बैठे देवेश ने उस के हाथ से मोबाइल छीन कर कहा, ”यह क्या कर रही हो तुम?’’

इतना कह कर देवेश ने झट से फोन काट दिया. इच्छा का फोन सेंट्रल टेबल पर रख कर उस ने अपना मोबाइल निकाला और एक वीडियो चला कर उस के सामने रख दिया.

इच्छा पलक झपकाए बगैर वह वीडियो देखती रही. उस वीडियो में इच्छा तो थी ही, पर उसे गिद्ध की तरह जो नोच रहा था, उस का चेहरा नहीं दिखाई दे रहा था.

देवेश ने कहा, ”इच्छा, अगर तुम ने किसी भी तरह की चालाकी की तो यह वीडियो वायरल करने में सेकेंड मात्र लगेगा.’’

देवेश के ये शब्द इच्छा के कान में ही नहीं, हृदय पर भी हथौड़े की तरह लगे. वह सोचने लगी कि यह वही देवेश सर हैं, जिन पर उसे क्रश था. जिन के स्पर्श के विचार मात्र से वह मंत्रमुग्ध हो जाती थी.

सेंट्रल टेबल पर रखा अपना मोबाइल और देवेश से चौकलेट का डिब्बा ले कर इच्छा खड़ी हुई तो जेसिका ने इशारा करते हुए कहा, ”इच्छा तेरी स्कर्ट पर खून का दाग है.’’

इच्छा ने अपने बैग से ओवरलैप स्कर्ट निकाली और दाग वाली स्कर्ट के ऊपर पहन ली. वह फ्लैट से बाहर जाने लगी तो देवेश ने कहा, ”रोज की तरह कल मिलता हूं ट्यूशन में, तुम्हारे घर.’’

जैसे ही इच्छा चलने लगी, उस के साथ जेसिका भी चल पड़ी थी. दोनों लिफ्ट से नीचे आईं और फिर सड़क पर पहुंचीं, जहां खड़ी हो कर औटो की राह देखने लगीं. औटो आया तो जेसिका ने पहले इच्छा को बैठाया, उस के बाद खुद बैठ गई.

इच्छा की समझ में यह नहीं आया कि वह मित्रता निभा रही थी या उसे इस बात का डर सता रहा था कि कहीं वह पकड़ी न जाए. आखिर उसी ने तो इच्छा को ट्यूशन के बहाने देवेश के जाल में फंसाया था. औटो में बैठ कर इच्छा को पछतावा हो रहा था कि उस ने मम्मी की बात क्यों नहीं मानी. उसे देवेश पर इस तरह आंख मूंद कर विश्वास नहीं करना चाहिए था. पर अब क्या?

तभी उस का फोन वाइब्रेट हुआ. उस ने देखा फ्रेंड रिक्वेस्ट वाली रिंकी के तमाम मैसेज थे. जेसिका अपनी दोस्त प्रतीक्षा से बात करने में व्यस्त थी तो इच्छा ने रिंकी का मैसेज पढऩे के लिए इनबौक्स खोला, ”इच्छा कहां हो तुम? मैं तुम्हें कब से मैसेज कर रही हूं, तुम जवाब क्यों नहीं दे रही हो? मेरे मना करने के बावजूद कहीं तुम देवेश के यहां ट्यूशन पढऩे तो नहीं चली गई?’’

इच्छा सोचने लगी कि आखिर यह रिंकी कौन है? वह देवेश सर के बारे में क्या जानती है? रिंकी से उसे कुछ मदद मिल सकती है या फिर वह भी जेसिका की तरह उस के साथ कोई खेल खेल रही है. लेकिन वह उस के बारे में इतना सब कुछ कैसे जानती है? अगर वह उस के बारे में सब जानती है तो जेसिका और देवेश सर के बारे में भी सब जानती होगी.

उसे रिंकी से बात करनी चाहिए. उसे मुसीबत में डाल कर यह जेसिका कैसे आराम से अपनी फ्रेंड से बात कर रही है. औटो जैसे ही इच्छा के घर के पास पहुंचा, इच्छा को उतार कर जेसिका चली गई. इच्छा उस से बात करना चाहती थी कि उस ने उस के साथ ऐसा क्यों किया, पर जेसिका ने मौका ही नहीं दिया.

इच्छा घर पहुंची तो सीधे अपने कमरे में चली गई. आज वह घर के किसी भी सदस्य का सामना नहीं कर पा रही थी. उसे खुद पर शरम आ रही थी. कपड़े उतार कर वह शावर के नीचे खड़ी हो गई. फ्रेश हो कर बाहर आई. वह कपड़े पहन ही रही थी कि रिंकी के धड़ाधड़ मैसेज आने लगे.

”इच्छा, मुझे बताओ कि आज तुम देवेश सर के घर गई थी?’’ फिर वही सवाल.

”आप कौन हैं और देवेश सर को कैसे जानती हैं?’’ बड़बड़ाने के साथ इच्छा की अंगुलियां मैसैज टाइप कर रही थीं.

”इच्छा, फालतू के सवाल कर के समय मत खराब करो. कहीं देवेश के घर तुम्हारे साथ कुछ गलत तो नहीं हुआ?’’

”तुम कौन हो यार? अचानक फ्रेंड रिक्वेस्ट भेजी और अब इस तरह के व्यक्तिगत सवाल पूछ रही हो.’’

”मैं तुम्हारी शुभचिंतक हूं.’’

”तुम मुझे कैसे जानती हो, क्या हम पहले कभी मिले हैं?’’

”अभी यह जानना जरूरी नहीं है इच्छा. यह जानना जरूरी है कि देवेश के घर तुम्हारे साथ क्या हुआ?’’

इच्छा अब इस सवाल का क्या जवाब दे? क्या किसी अंजान व्यक्ति से अपनी व्यक्तिगत बात कहनी चाहिए? पर रिंकी कह रही थी कि वह उस की शुभचिंतक है तो ऐसे में उसे क्या करना चाहिए? जो बात वह अपनी मम्मी से नहीं कह सकी, क्या वह बात रिंकी को बतानी चाहिए?

”सुनो इच्छा, मैं तुम्हारी खामोशी के पीछे की वजह और संताप समझ सकती हूं. मैं तुम से बस इतना कहना चाहती हूं कि अब तुम देवेश से दूर रहना.’’

”यह तो संभव नहीं है. कल वह फिर मेरे घर ट्यूशन पढ़ाने आएगा.’’

”पर अब तुम उस से दूर ही रहना. जितना हो सके, उस से दूर रहने की कोशिश करना.’’

”अब यह संभव नहीं है.’’

”पर क्यों?’’

”मजबूरी है.’’

”चौकलेट..?’’

”रिंकी, तुम्हें इस बारे में कैसे पता चला?’’

”यह जानना जरूरी नहीं है.’’

”जरूरी है रिंकी… तुम देवेश सर और चौकलेट के बारे में क्या जानती हो? मैं कैसे विश्वास करूं कि तुम मेरी शुभचिंतक हो?’’

”एक काम करो इच्छा, आज तुम्हारे साथ जो भी हुआ है, वह सब अपनी मम्मी से बता दो. बोलो, कर सकती हो ऐसा?’’

”नहीं, कभी नहीं. मैं उन्हें बता कर तकलीफ नहीं पहुंचाना चाहती.’’

”तो फिर मेरे ऊपर विश्वास करो. मैं तुम्हें इस दलदल से बाहर निकालना चाहती हूं.’’

”इस में मम्मीपापा को इनवौल्व किए बगैर कुछ हो सकता हो तो बताइए.’’

”कल देवेश तुम्हारे घर आए तो उस की कौफी में चौकलेट मिला देना. जिस तरह उस ने तुम्हें नशे की लत लगाई है, उसी तरह तुम भी उसे नशे की लत लगा दो.’’

”तो क्या देवेश सर खुद चौकलेट नहीं खाते?’’

”नहीं इच्छा, वह दूसरों को ड्रग्स की लत लगा कर खुद पैसे कमाता है.’’

”ओह.’’

”इच्छा, जैसा मैं ने कहा है, तुम वैसा करने को तैयार हो? देवेश को उसी की चाल में फंसाओगी?’’

”पर मेरे पास चौकलेट बहुत कम है और अब मुझे नशे की लत लग चुकी है.’’

”कुछ न कुछ तो करना ही पड़ेगा इच्छा. फिर कहां तुम्हारे पास पैसे की कमी है. तुम्हारे पापा तो काफी संपन्न आदमी हैं.’’

इच्छा सोच में पड़ गई. जवाब में इच्छा ने लिखा, ”नशे की लत लगा कर मैं ने अपनी जिंदगी तो बरबाद कर ली, अब मैं किसी दूसरे की जिंदगी नहीं बरबाद करना चाहती.’’

”क्या तुम नहीं चाहती कि तुम्हारे गुनहगार को सजा मिले?’’

”मेरी असली गुनहगार तो जेसिका है. उस ने जानबूझ कर बदइरादे से मुझे इस दलदल में धकेला है.’’

”मैं समझ सकती हूं इच्छा. जेसिका ने जो भी किया है, वह गलत किया है. पर यह भी तो हो सकता है कि उस ने देवेश के जाल में फंस कर यह सब किया हो.’’ रिंकी ने मैसेज में लिखा.

”हो सकता है. पर उस की मजबूरी की वजह से मैं अपना सब लुटा बैठी.’’

”सब कुछ यानी..?’’

अब इच्छा रिंकी को कैसे बताए कि आज देवेश के घर उस के साथ क्या हुआ था. इच्छा कुछ जवाब देती, उस के पहले ही रिंकी पूछ बैठी, ”इच्छा, देवेश के घर तुम्हारे साथ कुछ गलत तो नहीं हुआ?’’

रिंकी की बातों से इच्छा की समझ में आ गया था कि उसे सब कुछ पता है, जो उस के साथ हुआ है. तो भला उसे यह कैसे पता नहीं होगा कि आज देवेश सर के घर क्या हुआ है? यह रिंकी भला कौन है? इच्छा सोच ही रही थी कि रिंकी का अगला मैसेज आ गया, ”इच्छा, मैं तुम से कुछ पूछ रही हूं?’’

”नहीं रिंकी, ऐसा कुछ नहीं हुआ, जैसा तुम सोच रही हो.’’

”चलो, अच्छा हुआ. मुझे इसी बात का डर था, इसीलिए मैं तुम्हें देवेश के घर जाने से रोक रही थी. और हां, अब तुम उस के घर कभी मत जाना.’’

”यह संभव नहीं है. अब मैं नशे की आदी हो चुकी हूं, इसलिए अब मुझ से कोई कुछ भी करवा सकता है.’’

”इच्छा, थोड़ी हिम्मत करो, वरना जिंदगी बरबाद हो जाएगी. तुम अपनी मम्मी या पापा की मदद लो और चौकलेट खाना छोड़ दो.’’

”मैं मम्मी या पापा से इस विषय में कोई बात नहीं कर सकती. जब तुम्हें इतनी सब जानकारी है और तुम मेरी शुभचिंतक हो तो तुम्हीं मेरी कुछ मदद करो न.’’ इच्छा ने मैसेज भेजा.

”ठीक है, मैं करूंगी तुम्हारी मदद, पर तुम भी वादा करो कि मेरा पूरा सहयोग करोगी.’’

”ठीक है, तुम जैसा कहोगी, मैं तुम्हारा सहयोग करूंगी.’’

”रिंकी, मम्मी आ गई हैं. बाद में बात करती हूं.’’

”ओके.’’

फिलहाल तो इच्छा बहाना बना कर औफलाइन हो गई. पर इच्छा को रिंकी की बातों से लगा कि वह सचमुच उस की मदद करना चाहती है. पर क्यों? इस का जवाब इच्छा की समझ में नहीं आ रहा था. वह इसी सोच में डूबी थी कि पापा की आवाज आई, ”इच्छा बेटा, मैं तुम्हारे कमरे में आ सकता हूं?’’

इच्छा के पापा ने जिस लहजे में उस से अंदर आने के लिए पूछा था, उस से इच्छा को लगा कि आज उस के पापा बहुत खुश हैं. अंदर आ कर एक पैकेट इच्छा की ओर बढ़ाते हुए उन्होंने कहा, ”यह लो तुम्हारा गिफ्ट.’’

”गिफ्ट, पर आज क्या है?’’

”कुछ नहीं, मार्केट गया था, इसलिए खरीद लाया.’’

इच्छा ने पैकेट खोला. उस में आईपैड था. उसे देख कर उस के मुंह से निकल गया, ”ओह! कितना सुंदर आईपैड.’’

”ठीक है, अब तुम संभालो अपना आईपैड.’’ कह कर इच्छा के पापा कमरे से बाहर चले गए.

इच्छा ने आईपैड खोला और अपना अकाउंट बनाया. उस रात उस ने देवेश को फोन नहीं किया था. अगले दिन वह सुबह उठ गई, पर उस का कालेज जाने का मन नहीं हुआ. नहाधो कर उस ने नाश्ता किया और देवेश के घर से लाए चौकलेट के डिब्बे से एक चौकलेट निकाल कर खाई और बालकनी में किताब ले कर पढऩे बैठ गई. वह वहीं पढ़तेपढ़ते सो गई.

उस की आंखें तब खुलीं, जब मम्मी ने आवाज लगाई कि देवेश सर ट्यूशन पढ़ाने आ गए हैं.

इच्छा ने पहले देवेश के लिए कौफी बनाई और फिर कौफी और किताबें ले कर हौल में पहुंची. इच्छा अभी नोटबुक खोल ही रही थी कि उस की मम्मी आ कर बैठ गईं.

मम्मी के सामने वह चौकलेट के बारे में बात नहीं कर सकती थी, इसलिए उस ने नोटबुक में लिख कर देवेश के सामने रख दिया, ”मुझे चौकलेट चाहिए.’’

”कितनी?’’

”एक बड़ा पैकेट, जिस से बारबार मंगाने का झंझट न रहे.’’

”ठीक है, 20 हजार का है.’’

”तो छोटा दे दीजिए.’’

”वह 10 हजार का है.’’

”कल तो 5 हजार में दिया था.’’

”आज भाव बढ़ कर डबल हो गया है.’’

यह पढ़ कर इच्छा ने देवेश की ओर देखा तो वह च्यूंगम चबाते हुए उसी की ओर ताक रहा था. इस का मतलब था कि रिंकी सच ही कह रही थी. इसे सबक सिखाना ही चाहिए.

इच्छा बहाने से अपने कमरे में पैसे लेने गई तो उस के पैसे गायब थे. जब उस ने देवेश से कहा कि आज उस के पास पैसे नहीं हैं तो देवेश ने कहा, ”जब पैसे हों तब चौकलेट मंगा लेना. बिना पैसे के चौकलेट नहीं मिलेगी.’’

इच्छा ने हाथ जोड़ कर गिड़गिड़ाते हुए कहा, ”प्लीज सर, मुझे चौकलेट चाहिए.’’

”संभव ही नहीं है.’’

”कोई तो रास्ता होगा सर?’’

”एक काम करो, कल किसी पैसे वाले घर की लड़की को मुझ से ट्यूशन पढऩे के लिए बुला लाओ, जो तुम्हारी और अपनी चौकलेट का खर्च उठा सके.’’ आंखें झपकाते हुए देवेश ने कहा.

इच्छा सोच में पड़ गई कि यह देवेश टीचर है या चौकलेट बेचने के लिए टीचर बनने का ढोंग कर रहा है. इच्छा के मन में यह जो सवाल उठा था, वह था तो मुश्किल, पर महत्त्वपूर्ण था. उस के मन में आया कि वह इस पर रिंकी से जरूर बात करेगी. इच्छा कुछ और सोचती, देवेश ने खड़े हो कर कहा, ”अच्छा इच्छा, अब मैं चलता हूं, बाय.’’

इच्छा के दिमाग में आया कि देवेश तो उस के पापा से भी अच्छा बिजनेसमैन है. इच्छा लगभग गिड़गिड़ाते हुए बोली, ”प्लीज, रुकिए सर.’’

तभी उस के आईपैड पर मैसेज आया. मैसेज टोन सुन कर देवेश ने आईपैड की ओर देखते हुए कहा, ”वाह, नया आईपैड?’’

”हां, कल ही पापा लाए हैं.’’

”दिखाओ तो जरा.’’ देवेश ने आईपैड इच्छा के हाथों से लगभग छुड़ाते हुए कहा.

देवेश इच्छा के हाथों से आईपैड लगभग झटक कर मुसकराते हुए बोला, ”वाह इच्छा, तू तो बहुत लकी है. ऐसी बेटी को भी पापा इतना प्यार करते हैं.’’

इच्छा को देवेश की मुसकान में अब कुछ अजीब लगने लगा था. पहले जो मुसकान उसे आकर्षक लगती थी, अब वही किसी शातिर शिकारी की लग रही थी. देवेश आईपैड के स्क्रीन पर अंगुलियां फेरते हुए बोला, ”कितना स्मूथ टच है, इस में तो तेरा सब कुछ देखा जा सकता है न?’’

”क्या मतलब?’’ इच्छा ने पूछा.

”मतलब यह कि इस में तेरे सारे चैट, तेरी सारी तसवीरें, सब कुछ सेव होगा, है न?’’

इच्छा चुप रही. देवेश ने हलकी हंसी हंसते हुए कहा, ”चलो, अच्छा है, अब तो हम और भी अच्छे से जुड़े रहेंगे.’’

वह स्क्रीन पर कुछ सर्च करने लगा. तभी इच्छा ने देखा, देवेश ने किसी फोल्डर को खोला, जिस में उस की खुद की कुछ पुरानी तसवीरें थीं. स्कूल की यूनिफार्म में, कालेज फंक्शन की और कुछ ट्यूशन की सेल्फी भी. इच्छा के होंठ कांप उठे, ”ये तुम्हारे पास कैसे आईं?’’

देवेश ने बिना उस की ओर देखे ही कहा, ”जब तू अपने फोन से चैट करती है, तेरा डाटा क्लाउड पर आटो बैकअप होता है और तेरा फोन कई बार मेरे वाईफाई पर जुड़ा है न? बस, वहीं से सब मिल गया है.’’

इच्छा के रगों में जैसे बर्फ दौड़ गई.

उसे पहली बार समझ आया कि उस का औनलाइन होना भी उस की कमजोरी थी. देवेश ने एकदम सहज लहजे में कहा, ”डरने की जरूरत नहीं है इच्छा, जब तक तू मेरी है, ये तसवीरें किसी और के पास नहीं जाएंगी.’’

इच्छा के मन में गुस्सा उबल रहा था, पर उस की देह अब भी उस चौकलेट की गुलाम थी. वह जानती थी कि बिना चौकलेट के उस के हाथ कांपने लगते हैं, दिल धड़कने लगता है. उस ने हिम्मत जुटाई, ”सर, बस एक चौकलेट दे दीजिए न, उस के बाद आप जो कहेंगे, मैं वही करूंगी.’’

देवेश मुसकराया, ”पहले यह बताओ, रिंकी से तुम्हारा क्या रिश्ता है?’’

इच्छा चौंकी, ”रिंकी? आप… आप रिंकी को कैसे जानते हैं?’’

”जानता ही नहीं, बल्कि वह पहले मेरी स्टूडेंट थी. बहुत काबिल, बहुत होशियार, पर उस ने मुझे धोखा दिया.’’

”क्या मतलब?’’

देवेश ने आईपैड टेबल पर रखते हुए कहा, ”रिंकी ने मेरे साथ वही करने की कोशिश की थी, जो तुम अब सोच रही हो. चौकलेट में जहर मिलाया था उस ने. पर मैं भी बेवकूफ नहीं हूं. उस दिन के बाद वह गायब हो गई. पता नहीं जिंदा है या नहीं.’’

इच्छा का गला सूख गया. सोचने लगी, ‘क्या यह वही रिंकी थी, जो उसे मैसेज कर रही थी? क्या वह सचमुच जिंदा है या फिर, उस का नाम किसी और ने इस्तेमाल किया है?’

देवेश दरवाजे की ओर बढ़ा, ”अब मैं चलता हूं इच्छा. पर याद रखना, कल की क्लास मेरे घर होगी. और हां…’’ वह मुसकराया, ”तुम्हारे आईपैड में मैं ने एक छोटा सा गिफ्ट डाल दिया है, देख लेना.’’

देवेश के जाते ही इच्छा ने आईपैड उठाया. उस की अंगुलियां कांप रही थीं. स्क्रीन अनलौक करते ही उसे एक नया ऐप दिखाई दिया ‘चौकलेट ट्रैकर’.

क्लिक करते ही ऐप खुला. उस में लिखा था, ‘वेलकम बैक, डियर विश!’

नीचे एक वीडियो आइकौन था.

जैसे ही उस ने वीडियो खोला, वह सन्न रह गई. उस वीडियो में वही थी, देवेश के घर की वही घटना, वही दृश्य… लेकिन इस बार वीडियो के नीचे एक काउंटडाउन चल रहा था- ’00:23:45- वीडियो विल अपलोड आटोमैटिकली…’

इच्छा चिल्लाते हुए ऐप बंद करने लगी, पर नहीं हुआ. स्क्रीन फ्रीज हो गई थी.

तभी आईपैड पर पौपअप आया, ‘टू स्टाप द अपलोड, फौलो द वायस.’

उस के कमरे में देवेश की एक हलकी सी आवाज गूंजी, ”इच्छा, अब बचने का एक ही रास्ता है. मेरे घर आओ, अभी.’’

इच्छा का सिर घूमने लगा. वह चीखना चाहती थी, पर आवाज गले में अटक गई. तभी उस का मोबाइल वाइब्रेट हुआ. रिंकी का मैसेज था, ”मत जाओ इच्छा. वह फिर से वही चाल दोहरा रहा है. आईपैड में जो वीडियो दिख रहा है, उसे मैं ने ब्लौक कर दिया है. अब वह अपलोड नहीं होगा.’’

इच्छा की सांस जैसे लौट आई. उस ने झट से टाइप किया, ”रिंकी, तुम सच में हो या कोई गेम खेल रही हो?’’

”मैं असली हूं इच्छा और अब तुम्हारे पास एक मौका है, देवेश को पकड़वाने का.’’

”कैसे?’’

”तुम्हारा आईपैड मेरी ट्रैकिंग से जुड़ चुका है. कल जब वह तुम्हारे घर आएगा तो सिर्फ कौफी नहीं, उस के शब्द, उस के चेहरे, सब रिकौर्ड होंगे. बस, तुम शक मत होने देना.’’

”लेकिन अगर वह कुछ कर बैठा तो..?’’

”इस बार डरना नहीं इच्छा. अब खेल उसी के खिलाफ है.’’

रात भर इच्छा सो नहीं पाई. कभी देवेश की आंखें याद आतीं, कभी रिंकी के मैसेज. सुबह जब आंखें खुलीं, कमरे में धूप फैली हुई थी.

आईपैड टेबल पर पड़ा था. स्क्रीन पर एक नया नोटिफिकेशन था, ”रिंकी ने एक फाइल भेजी थी, TRUTH_01.MP4..’’

धड़कते दिल से इच्छा ने वीडियो चलाया. वीडियो में एक लड़की थी, थकी हुई, कमजोर, पर नजर में आग थी. वह बोली, ”इच्छा, मैं रिंकी हूं. वही रिंकी, जो देवेश के जाल में फंसी थी. जिस दिन मैं ने सच सामने लाने की कोशिश की, उस ने मुझे गायब कर देने की धमकी दी. मैं जिंदा हूं, पर अब कानून के साथ हूं. कल जब वह तुम्हारे घर आएगा, पुलिस को इशारा करना, मैं बाहर रहूंगी.’’

इच्छा के हाथ कांप रहे थे. अब यह कहानी केवल उस की नहीं थी. यह उन तमाम लड़कियों की कहानी थी, जो चौकलेट की मिठास में फंस कर जहर चख लेती हैं.

घड़ी में 9 बज चुके थे. डोरबेल बजी. मम्मी किचन में थीं. इच्छा ने गहरी सांस ली और दरवाजे की ओर बढ़ी. दरवाजे पर देवेश खड़ा था. वही मुसकान, वही नकली सौम्यता. उस ने कहा, ”हाय इच्छा… आज तुम पहले से ज्यादा खूबसूरत लग रही हो.’’

इच्छा ने ठंडे स्वर में कहा, ”अंदर आइए सर, कौफी तैयार है.’’

उस ने कौफी सर्व की. इस बार कप के नीचे कैमरा औन था और आईपैड रिकौर्ड कर रहा था. देवेश ने पहला घूंट लिया, फिर मुसकराया, ”आज की कौफी कुछ अलग लग रही है, क्या बात है?’’

इच्छा के होंठों पर भी हलकी मुसकान तैर गई, ”आज की कौफी में सच्चाई का स्वाद है सर.’’

इतना कह कर वह उठी, बालकनी की ओर गई और धीरे से बाहर झांका. नीचे ब्लैक कलर की जीप खड़ी थी और उस में बैठी थी रिंकी, फोन कान से लगाए हुए.

देवेश ने कप नीचे रखा और कुछ कहने को हुआ ही था कि दरवाजा धड़ाम से खुला. एक इंसपेक्टर और 2 पुलिस वाले अंदर आए. इंसपेक्टर ने कहा, ”मिस्टर देवेश वर्मा, आप को मानव तस्करी और ड्रग्स सप्लाई के आरोप में गिरफ्तार किया जाता है.’’

देवेश की आंखें फैल गईं. वह इच्छा की ओर झपटा, ”तूने धोखा दिया मुझे!’’

इच्छा पीछे हटी, पर इस बार डर नहीं था. उसने कहा, ”नहीं सर, बस न्याय की फ्रेंड रिक्वेस्ट एक्सेप्ट की है.’’

पुलिस उसे ले गई. रिंकी ऊपर आई, इच्छा के कंधे पर हाथ रख कर बोली, ”देखा, जो डरते हैं, वही हारते हैं.’’

इच्छा की आंखों से आंसू बह निकले, ”रिंकी, अब मैं आजाद हूं न?’’

रिंकी मुसकराई, ”हां इच्छा, अब तू सिर्फ अपनी इच्छा से जीएगी.’’

आईपैड की स्क्रीन पर अब नया नोटिफिकेशन चमक रहा था, ‘केस कलोज्ड: फ्रेंड रिक्वेस्ट एक्सप्टेड. Hindi Story

 

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