Crime Stories: ताऊ और ताई तो शालू को पढ़ालिखा कर उस की जिंदगी रौशन करना चाहते थे जबकि वह कशिश के प्यार में पड़ कर अपने शुभचिंतक ताऊ और ताई को धोखा दे रही थी. इस के बाद उस ने क्या किया...

बच्चे पढ़लिख कर कामयाबी के शिखर पर पहुंच जाएं हर मातापिता के लिए यह बेहद खुशी की बात होती है. उन्हें लगता है कि उन की जिंदगी भर की मेहनत कामयाब हो गई. उत्तर प्रदेश सरकार के लोक निर्माण विभाग में सहायक अभियंता शनसवीर सिंह और उन की पत्नी निर्मला खुश थीं कि उन का युवा बेटा पुलकित सिंह भारतीय सैन्य अकादमी (आईएमए) में सलैक्शन के बाद लेफ्टिनेंट बन गया था.

11 जून, 2015 को देहरादून आयोजित पासिंग आउट परेड में जब उन्होंने अपनी आंखों से बेटे के कंधों पर स्टार लगते देखे तो दोनों की खुशी का ठिकाना नहीं रहा. शिक्षा के बल पर उन्होंने बेटे को इस मुकाम तक पहुंचा दिया था. मृदुभाषी शनसवीर खुद तो उच्च शिक्षित थे ही, उन की पत्नी निर्मला भी उच्च शिक्षित थीं. उन्होंने एमएससी (फिजिक्स) व बीएड की डिग्रियां ली थीं और शिक्षिका रही थीं, लेकिन सन 2000 में उन्होंने पारिवारिक कारणों से नौकरी को अलविदा कह दिया था.

शनसवीर जनपद मेरठ की मवाना रोड स्थित पौश कालोनी डिफैंस कालोनी की कोठी नंबर सी-53 में रहते थे. उन के 2 ही बच्चे थे, बड़ी बेटी प्रिंसी और उस से छोटा पुलकित. प्रिंसी ने एमबीबीएस, एमडी किया था, जिस का उन्होंने विवाह कर दिया था. प्रिंसी के पति भी डाक्टर थे. प्रिंसी दिल्ली के राममनोहर लोहिया अस्पताल में बतौर सीनियर रेजीडेंट डाक्टर नियुक्त थीं. शनसवीर सिंह मूलरूप से मुजफ्फरनगर जिले की जानसठ तहसील के गांव जंघेड़ी के रहने वाले थे. उन के पिता वेद सिंह किसान थे. शनसवीर 5 भाइयों में चौथे नंबर पर थे. उन के अन्य भाई गांव में ही रहते थे. इन में सुभाष की तबीयत खराब रहती थी, उन का नियमित उपचार चल रहा था.

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