Crime Stories: शिवानी मनोज से प्यार ही नहीं करती थी, बल्कि उसे अपना सब कुछ सौंप भी चुकी थी. फिर ऐसा क्या हुआ कि उसे मनोज की हत्या करनी पड़ी मनोज कैनवास पर अपनी कल्पना के रंग भरने में मशगूल था. बीचबीच में वह गहरे चिंतन में खो जाता था, जैसे ही कोई बिंब उस के मस्तिष्क में उभरता, उस का ब्रुश हरकत में आ जाता. अपने कमरे के शांत वातावरण में वह पूरी तरह पेंटिंग बनाने में लीन था. तभी किसी महिला की हंसी की आवाज ने उस का ध्यान भंग कर दिया. उस ने पलट कर देखा तो शिवानी खड़ी थी, जो रिश्ते में उस की भाभी लगती थी.

मनोज ने मुसकराते हुए कहा, ‘‘ओह तो आप हैं.’’
‘‘क्यों... मैं यहां नहीं आ सकती क्या?’’ शिवानी ने शरारती लहजे में पूछा.
‘‘क्यों नहीं आ सकतीं भाभी. आप जब चाहें तब आ सकती हैं. बात यह थी कि मेरा पूरा ध्यान पेंटिंग में था, इसलिए मुझे पता ही नहीं चला कि आप कब आ गईं. आप की हंसी की आवाज मेरे कानों में पड़ी, तब आप के आने का पता चला.’’
‘‘इस का मतलब कि मेरे आने से तुम डिस्टर्ब हो गए. इस वक्त मेरा यहां आना तुम्हें अच्छा नहीं लगा होगा?’’ शिवानी ने उस की आंखों में झांकते हुए कहा.
‘‘नहीं भाभी, ऐसी कोई बात नहीं है. आप के आने से तो मुझे बहुत खुशी होती है. एक तरह से प्रेरणा मिलती है. अरे आप खड़ी क्यों हैं, बैठिए न.’’ मनोज ने कुरसी की ओर इशारा करते हुए कहा.
शिवानी कुरसी पर बैठ गई और पेंटिंग को गौर से देखने लगी. पलभर बाद उस ने कहा, ‘‘मनोज, मैं तुम से एक बात कहूं?’’






