Hindi Stories: रूढि़वादी विचारों में फंस कर लोग आर्गन डोनेट करने में हिचकिचाते हैं. लेकिन एक आम गृहिणी संतोष ने पति के आर्गन डोनेट कर के कई लोगों को नई जिंदगी दी. आज चिकित्सा के क्षेत्र में जितना तेजी से विकास हो रहा है, मरीजों की संख्या भी उतनी ही तेजी से बढ़ती जा रही है. इस

का अनुमान प्राइवेट और सरकारी अस्पतालों में पहुंचने वाले मरीजों से लगाया जा सकता है. प्रदूषण, असंयमित दिनचर्या व अन्य वजहों से आज आर्गन फेल्योर मरीजों की संख्या भी बढ़ रही है. आर्गन डोनेट कर के इस तरह के मरीजों की सहायता की जा सकती है, लेकिन समाज में फैले रूढि़वादी विचार इस रास्ते में बाधक बने हुए हैं. पर हाल ही में एक मरीज के घर वालों ने रूढि़वादी विचारों को त्याग कर एक ऐसा फैसला लिया कि कई लोगों की जिंदगी बदल गई.

दिल्ली के पश्चिम विहार निवासी रामबाबू आनंद पर्वत स्थित किसी निजी कंपनी में नौकरी करते थे. 29 जुलाई की शाम 6, साढ़े 6 बजे ड्यूटी पूरी कर के शाम को स्कूटर से वह अपने घर लौट रहे थे, तभी पंजाबीबाग के नजदीक किसी भारी वाहन ने पीछे से उन के स्कूटर में टक्कर मार दी. जिस से वह स्कूटर से उछल कर दूर जा गिरे और बेहोश हो गए. टक्कर मार कर वह भारी वाहन तेज गति से भाग गया. 57 वर्षीय रामबाबू को देखने के लिए सड़क पर चलने वाले कई लोग जमा तो हो गए, लेकिन इतनी हिम्मत कोई नहीं कर पा रहा था कि उन्हें किसी अस्पताल तक पहुंचा सके. कुछ लोगों की मानवीयता जागी भी, लेकिन वे घायल रामबाबू को अस्पताल ले जा कर पुलिस के लफड़े में नहीं पड़ना चाहते थे.

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