UP News: परिवार पैसों से नहीं, प्यार से खुश रहता है, जिस के लिए संयम, विवेक, समर्पण और आपसी तालमेल जरूरी है. डा. विशाल यही नहीं कर पाए, जिस की वजह से आज वह पत्नी को प्रताडि़त कर मौत के मुंह तक पहुंचाने के आरोप में जेल में हैं.

किसी परिवार की खुशहाली का मूल आधार सिर्फ दौलत ही नहीं, त्याग, समर्पण, विश्वास, आपसी प्यार, अपनापन और भावनाओं का संगम होना जरूरी है. जहां यह सब नहीं होता, वहां खुशियां पानी के बुलबुले और कोहरे जैसी होती हैं. जिस तरह कुछ वक्त के बाद बुलबुला अपना वजूद खो देता है और कोहरा छंट जाता है, कुछ वैसा ही खुशियों के साथ होता है. दौलत की चकाचौंध से प्यार करने वालों की अन्य मामलों में झोलियां खाली ही रह जाती हैं, क्योंकि पैसा जरूरतों को तो जरूर पूरी कर देता है, लेकिन वह सब नहीं दे पाता, जो खुशहाल जिंदगी के लिए जरूरी होता है.

राजेश कौड़ा इन बातों को अच्छी तरह जानतेसमझते थे. व्यवहारकुशल राजेश के लिए उन का अपना परिवार ही पूरी दुनिया था. वह सरकारी मुलाजिम थे. हर आम आदमी की तरह वह भी चाहते थे कि उन के परिवार में खुशियों के जुगनू हमेशा रोशनी बिखेरते रहें. इसी सोच के समुद्र में उन्होंने प्यार, समर्पण और जिम्मेदारियों की किश्ती को हमेशा चलाया था. राजेश कौड़ा उत्तर प्रदेश के शहर मेरठ के मोहल्ला अरविंदपुरी के रहने वाले थे. परिवार के संचालन व बच्चों की संस्कारपूर्ण परवरिश में गृहणियों का बड़ा योगदान होता है. उन की पत्नी प्रेमलता ने इस काम को दिल के साथसाथ दिमाग से पूरा किया. उन की 3 बेटियां, शालिनी, सोनिया और शिवानी थीं. बच्चे मातापिता के लिए अनमोल पूंजी की तरह होते हैं, जिसे वे अपने ढंग से सहेज कर रखते हैं.

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