UP Crime: खेत पर जाते समय दिनदहाड़े कुछ युवकों ने सुनीता के सामने उस की बेटी मनीषा को किडनैप करने की कोशिश की तो सुनीता के विरोध करने पर युवकों ने सुनीता की हत्या कर दी और मनीषा को किडनैप कर ले गए. इस कांड के बाद गांव में तनाव व्याप्त हो गया और प्रदेश सरकार की भी नींद उड़ गई. कौन थे किडनैपर और क्यों किया गया मनीषा का किडनैप?

कहते हैं कि बालक उम्र का प्यार न तो जातपात व ऊंचनीच देखता है और न अमीरीगरीबी. इस आयुवर्ग के प्यार में एक ऐसा आकर्षण होता है, जिस के पाश में फंसे किशोर न तो समाज की बंदिशों को मानते हैं, न ही समाज की वर्जनाओं को. जाहिर है ऐसे प्यार का अंजाम भी खतरनाक होता है. पारस सोम और मनीषा का प्यार भी शायद समाज में ऊंचनीच के भेदभाव के बीच पनपा एक ऐसा ही प्यार था, जिस ने दिल्ली से सटे उत्तर प्रदेश के मेरठ जिले में सरधना थाना क्षेत्र के कपसाड़ गांव को जातीय भेदभाव की आग में झुलसने पर मजबूर कर दिया.

सुनीता की आंखों के सामने ही उस की बेटी को कुछ युवकों द्वारा ले जाने की कोशिश हुई तो उस ने विरोध किया फलस्वरूप उस पर जानलेवा हमला हुआ, जिस में उसकी जान चली गई

हालात ऐसे बने कि कपसाड़ गांव बवाल की आग में जलतेजलते बचा. गांव की गली से ले कर चट्टीचौराहे तक पुलिस छावनी बन गए. इस गांव में न कोई आ सकता था, न जा सकता था. किसी को अगर आनाजाना भी होता तो उसे पुलिस को पहले संतुष्ट करना पड़ता कि वह किसी गलत इरादे से गांव में नहीं जा रहा है. कपसाड़ गांव मेरठ महानगर की सीमा से सटा होने के कारण संपन्न और घनी आबादी वाला है. राजपूत और जाटव बिरादरी बहुल इस गांव में कुछ वैश्य, ब्राह्मण और अन्य जातियों के लोग भी रहते हैं. राजूपत जाति के लोग संपन्न और बड़े खेतिहर किसान हैं.

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