Hindi Crime Stories: अपने परिवार के साथ खुशहाल जीवन बिताने वाले आनंदपाल सिंह उर्फ पप्पू को कुछ मौकापरस्त नेताओं ने बंदूक उठाने को मजबूर किया था, आज वही नेता उस से खौफ खा रहे हैं और सरकार से उसे गिरफ्तार करने की मांग कर रहे हैं.
3 सितंबर, 2015 को राजस्थान के जिला नागौर की डीडवाना कोर्ट में कुख्यात अपराधी आनंदपाल सिंह उर्फ पप्पू के खिलाफ चल रहे नानूराम हत्याकांड का फैसला सुनाया जाना था. उसे 15 सदस्यीय पुलिस टीम अजमेर जेल से डीडवाना ले कर आई थी. उस के 2 साथी श्रीबल्लभ और सुभाष मुंड भी उस के साथ थे. कोर्ट में वैसे भी भारी संख्या में पुलिस तैनात रहती थी, लेकिन उस दिन रोज की अपेक्षा कुछ ज्यादा ही पुलिस तैनात की गई थी.
फैसले की घड़ी आई तो कोर्ट में सन्नाटा छा गया. लेकिन माननीय जज ने सबूतों के अभाव में आनंदपाल सिंह और उस के साथियों को इस केस से बरी कर दिया था. इस के बाद कोर्ट में मौजूद आनंदपाल सिंह के समर्थकों की खुशी का ठिकाना नहीं रहा. वे इतने खुश हुए कि मिठाई मंगा कर न्यायालय परिसर में ही बांटने लगे. वे जो मिठाई बांट रहे थे, उस में से कुछ में उन्होंने नींद की दवा मिला दी थी, जिसे उन्होंने कमांडो सहित वैन में सवार उन 15 पुलिसकर्मियों को खिला दी, जो आनंदपाल सिंह को अजमेर जेल से लाए थे. लेकिन वैन के ड्राइवर को उन्होंने वह नींद की दवा वाली मिठाई नहीं दी थी.
मिठाई खाने के बाद पुलिस वालों ने आनंदपाल सिंह और उस के साथियों को पुलिस वैन में बिठाया और अजमेर की ओर चल दिए. थोड़ी दूर जाने के बाद पुलिस वालों को नींद आने लगी. पुलिस वालों को ऊंघते देख आनंदपाल सिंह मंदमंद मुसकराया. उसे लगा कि अब उस की योजना सफल होने वाली है. पुलिस वैन जब डीडवाना और परवतसर के बीच गांगवा गांव के पास पहुंची तो सामने से सफेद रंग की एक जीप पुलिस की गाड़ी के सामने इस तरह आ कर रुकी कि पुलिस की गाड़ी आगे न निकल सके.






