Hindi Stories: लड़कियों के प्रति खासकर हसीन लड़कियों के प्रति सभी का रवैया एक जैसा होता है बेरहम और कांटेदार, जो उस हसीना के शरीर पर खराशें डाल देते हैं. ऐसा ही कुछ जरीना के साथ हुआ, जिस की वजह से वह डौली बन गई.

पहले मेरा नाम जरीना था. उन दिनों मेरे बदन पर ढंग के कपडे़ तक नहीं होते थे. हमारे घर में अच्छा खाना नहीं पकता था. लोग मेरे सिर पर सलीके से जमे हुए दुपट्टे और झुकी हुई निगाहों को देख कर मेरे बारे में दकियानूसी होने का फतवा लगा देते थे. कहने का मतलब कि हम बेहद गरीब थे. मैं अपने वालिदैन के साथ मलेर में रहती थी. यह शहर से कुछ फासले पर गरीबों की बस्ती थी. यहां हुकूमत की तरफ से क्वार्टर बना कर अलाट कर दिए गए थे. अब्बा को भी एक 80 गज का क्वार्टर अलाट हो गया था.

घर में हम 6 लोग थे—अब्बा, अम्मी, हम 2 बहनें और 2 भाई. मैं बहनभाइयों में सब से बड़ी थी. मैं समझती हूं कि लड़कियों को सब से बड़ी नहीं होना चाहिए, वरना उन की आधी उम्र दूसरों को समेटते हुए गुजर जाती है. कम से कम गरीब घराने में अव्वल तो लड़कियों की जरूरत ही नहीं होती. अगर हो भी तो तीसरे या चौथे नंबर पर हो. बहरहाल, अब्बा ने हम सब को एक पास के स्कूल में दाखिला दिला दिया था. जिंदगी बुरीभली गुजर रही थी. अब्बा एक औफिस में काम करते थे. मलेर से शहर का फासला लंबा था, इसलिए अब्बा 5 बजतेबजते घर से औफिस के लिए निकल जाते थे.

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